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Author: dipanshu

उत्तराखंड की 10 जगहें जो आपको देखनी चाहिए

उत्तराखंड की 10 जगहें जो आपको देखनी चाहिए

देवभूमि उत्तराखंड का प्राकृतिक सुन्दरता में कोई मुकाबला नहीं है। बर्फ से ढ़के पहाड़े, देवदार के घने जंगल, नदियां और झीलें आपका मन मोह लेते हैं । उत्तराखंड की अनगिनत जगहों में से चुनी हुई 10 जगहें में आपके सामने रख रहा हूँ।

1- जागेश्वर

Source- https://en.wikipedia.org/wiki/Jageshwar_Temples,_Uttarkhand#/media/File:Image_ank.JPG

ऊंचे पहाडों, देवदार के घने जंगलों और जटागंगा नदी के किनारे बसा है उत्तराखंड का जागेश्वर शिव धाम। अलमोड़ा से करीब 35 किलोमीटर दूर घने जंगल में मौजूद जागेश्वर पहुंचते ही असीम शांति का एहसास होता है। जागेश्वर की गणना भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंगों में की जाती है। यहां 7वीं शताब्दी से 18 वीं शताब्दी के बीच करीब 125 मंदिर बनाए गए हैं ।मान्यता है भगवान शिव के लिंग रूप की पूजा जागेश्वर से ही शुरू हुई। जागेश्वर को ‘कुमाऊँ का काशी’ भी कहा जाता है। जागेश्वर प्राचीन कैलाश मानसरोवर मार्ग पर स्थित है। ये अल्मोड़ा से करीब 35 किलोमीटर दूर है।

2- बिनसर


प्रकृति का अनुछुआ सौंदर्य देखना चाहते हैं तो बिनसर जरूर जाइए। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के पास का बिनसर एक वन्य प्राणी विहार भी है। बांज और बुरांस के जगलों वाले बिनसर में तेंदुए पाए जाते है। जंगल भी इतना घना कि कुछ इलाकों में सूर्य की रोशनी भी शायद ही पहुंचती हो। बिनसर से हिमालय की नंदा देवी, त्रिशुल, पंचाचुली, नंदाकोट, मृगधूनी जैसी बर्फीली चोटियों का 300 किलोमीटर लंबा अद्भुत नजारा दिखाई देता है। आधुनिक सुविधाओं से दूर यहां कुछ दिन बिताने का अनुभव जिंदगी भर नहीं भुलाया जा सकता। बिनसर अल्मोड़ा से करीब 30 किलोमीटर है।

3- रामगढ़

गुरू रविन्द्रनाथ टैगोर ने यहां रहकर गीतांजली का कुछ हिस्सा लिखा था। हिन्दी कवियित्री महादेवी वर्मा ने भी यहां के शान्त और सुकून भरे माहौल में लेखन किया । उत्तराखंड के रामगढ़ कस्बे का यह इतिहास इसे खास बनाता है। इसके साथ यहां हिमालय की बेजोड़ खूबसूरती को जोड़ दे तो फिर इस जगह का कोई मुकाबला नहीं। समुद्रतल से 1729 मीटर ऊंचाई पर बसे रामगढ़ की आबोहवा फलों की खेती के भी माकूल है। आडू, खुमानी, सेब जैसे फलों के बगीचों की यहां कमी नहीं इसलिए इसे  ‘कुमाऊँ का फलों का कटोरा’ भी कहा जाता है। रामगढ़ नैनीताल से करीब 34 किलोमीटर दूर है।

4- मुक्तेश्वर

उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत जगहों में मुक्तेश्वर का नाम लिया जाता है। नैनीताल जिले का यह छोटा का कस्बा कुछ दिन शांति से बिताने वाले पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। 2286 मीटर की ऊंचाई इसके मौसम को खास बनाती है। इस जगह का नाम यहां भगवान शिव के मंदिर के नाम पर पड़ा जिसे मुक्तेश्वर धाम कहा जाता है। 1893 में यहां इडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई जहां आज भी जानवरों से जुडें मामलों पर रिसर्च किया जाता है। मुक्तेश्वर रामगढ़ से 30 किलोमीटर है।
 

5- रानीखेत

रानीखेत को प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग माना जाता है। रानीखेत की खूबसूरती को शब्दों में नहीं उतारा जा सकता इसे यहां आकर ही महसूस किया जा सकता है। अंग्रेजों के समय इसे सैनिक छावनी बनाया गया। सैनिक छावनी होने के कारण इसका रखरखाव देखते ही बनता है। साफ सुथरी सड़कें, देखने के लिए एक प्यारा सा गोल्फकॉर्स , सेना का म्यूजियम, फलों के बगीचे और प्राचीन मंदिर इसे और भी खास बनाते हैं। यहां का चौबटिया फल उद्यान देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

6- शीतलाखेत
जब बस जंगल के बीच रहने का मन करे , आप चाहें कि आस पास घूमते हिरण आपको दिखाई देते रहें, सुबह चिड़ियों के चहचहाने से आपकी नींद खुले और साथ में पहाडी मौसम का आनंद भी मिले तो बस शीतलाखेत चले आएं। रानीखेत के पास बसा यह छोटा सा गांव बस आराम करने के लिए ही है। कुछ करना चाहें तो  करीब तीन किलोमीटर की चढाई करके पहाड़ की चोटी पर बने मंदिर तक जाएं और मंदिर की चोटी से उत्तराखंड के शानदार नजारों का मजा लें। ये रानीखेत से शीतलाखेत करीब 30 किलोमीटर है।
 

7-नैनीताल

एक बड़ी सी झील, उसमें तैरती रंग-बिरंगी नावें, पानी में दिखाई देता शहर का अक्स,   किनारे बनी माल रोड, पुराने चर्च और इमारतें। अंग्रेजी दौर की खनक और आधुनिकता का अजब मेल है नैनीताल। अंग्रेजों ने आराम करने के लिए उत्तराखंड के इस हिल स्टेशन को बसाया था । खास बात यह है कि उस दौर की खूबसूरती को नैनीताल ने आज भी संजो कर रखा है। कहा जाता है मां सती की आंख ( नैन) यहां गिरी थी जिसके आधार पर इसका नाम नैनीताल पड़ा। झील के किनारे नैयना देवी का प्राचीन मंदिर भी है जो 64 शक्तिपीठों में से एक है।  

8-चौकोरी
ऊंचे बर्फीले पहाडों और घनों जगलों से घिरा है उत्तराखंड का छोटा सा कस्बा चौकोरी। यहां से पंचाचूली और नंदा देवी की बर्फ से ढकी चोटियों का अद्भुत दृश्य नजर आता है। ऐसा लगता है कि हम बिल्कुल इन पहाडों के सामने खडे हैं। यह अनजाना कस्बा प्रकृति प्रेमी पर्यटकों के बीच धीर-धीरे लोकप्रिय हो रहा है। चौकोरी समुद्र तल से 2010 मीटर की ऊंचाई पर है। प्रकृति की अनछुई सुन्दरता को करीब से महसूस करने के लिए चौकोरी बढिया जगह है। यह कस्बा नैनीताल से 173 किलोमीटर की दूरी पर है।

9- मुनस्यारी
उत्तराखंड के चीन से लगते जिले पिथौरागढ का खूबसूरत कस्बा है मुनस्यारी। यह इलाका इतना खूबसूरत है कि इसे छोटा कश्मीर भी कहा जाता है। मुनस्यारी रोमांचक खेल और प्राकृतिक सुन्दरता पसंद करने वाले के बेहतरीन है। मुनस्यारी से ऊपरी हिमालय के कई ट्रेकिंग रास्तों की शुरूआत होती है। यहां से मिलन और रालम ग्लेशियर की चढ़ाई शुरू की जाती है। नंदा देवी चोटी की चढाई का आधार भी मुनस्यारी ही है।यहां से भी पंचाचूली, त्रिशूल और नंदा देवी की बर्फीली चोटियों का मनभावन नजारा दिखाई देता है। मुनस्यारी अल्मोड़ा से 200 किलोमीटर दूर है।

10- अल्मोड़ा

उत्तराखंड का प्राचीन और ऐतिहासिक शहर है अल्मोड़ा।1650 मीटर की ऊँचाई पर बसा अल्मोड़ा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह कुमाऊं के चंद राजाओं की राजधानी रहा। अल्मोड़ा को उत्तराखंड का सांस्कृतिक केन्द्र कहा जाता है। यहां के बाजार की पतली सड़कों पर घूमें तो लगता है पुराने समय में आ गये हैं। लकड़ी की बनी छोटी-छोटी दुकानें इस शहर को अनोखा रुप देती हैं। इस शहर के पास कई प्राचीन मंदिर हैं जो देखे जा सकते हैं। अल्मोड़ा की होली भी बहुत लोकप्रिय है। अल्मोड़ा आएं तो यहां कि प्रसिद्ध बाल मिठाई खाना ना भूलें। अल्मोड़ा नैनीताल से 60 किलोमीटर दूर है।

नोट- ये जगहें मेरे ब्लॉग पर पिछले साल के ट्रेवल पोस्टकार्ड सीरीज में शामिल की गई थी।

पटनीटॉप

पटनीटॉप

पटनीटॉप
जम्मू- कश्मीर का बहुत प्रसिद्ध हिल स्टेशन है पटनीटॉप। समुद्रतल से 2024 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस कस्बे में पहुंचते ही देवदार के घने जंगल आपका स्वागत करते हैं। यहां चारों तरफ प्राकृतिक सुन्दरता फैली हुई है। गर्मियों के मौसम में यहां ठंड का अहसास होता है तो सर्दियों में बर्फबारी का मजा लिया जा सकता है। यहां पर ट्रेकिंग के लिए कई रास्ते हैं जिनसे इन पहाडों में घूमा जा सकता है। यहां कई प्राचीन मंदिर भी देख सकते हैं। पटनीटॉप जम्मू से करीब 112 किलोमीटर दूर है।

वेरीनाग

वेरीनाग

वेरीनाग
कश्मीर घाटी की लोकप्रिय और खूबसूरत जगह है वेरीनाग। कश्मीरी भाषा में नाग का मतलब होता है पानी का स्रोत। वेरीनाग को ही झेलम नदी का मुख्य स्रोत माना जाता है। यहां बादशाह जहांगीर ने इस झरने के चारों तरफ अष्टकोणीय तालाब बनवाया। बाद में शाहजहां के समय यहां मुगल बगीचा बनवाया गया। कहा जाता है कि यहां का साफ नीला पानी कभी नहीं सूखता। श्रीनगर से जम्मू जाने वाले रास्ते पर वेरीनाग देखा जा सकता है।यह श्रीनगर से 78 किलोमीटर दूर है।

ट्यूलिप गार्डन

ट्यूलिप गार्डन

ट्यूलिप गार्डन
ट्यूलिप शब्द सुनते ही हालैंड का नाम दिमाग आता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन कश्मीर के श्रीनगर में है। डल झील के पास बने इस बगीचे में दूर-दूर तक रंगबिरंगे ट्यूलिप खिले नजर आते हैं। बगीचे के पीछे ऊंचे पहाड़ इसको और भी खूबसूरत बना देते हैं। यहां करीब 60 तरह के ट्यूलिप देखे जा सकते हैं। ट्यूलिप साल में केवल कुछ दिनों के लिए अप्रेल के आस पास ही खिलते हैं। श्रीनगर में होने वाला वार्षिक ट्यूलिप उत्सव अब यहां की पहचान बन चुका है।

नगिन झील

नगिन झील


नगिन झील
श्रीनगर का एक खूबसूरत हिस्सा है नगिन झील। चारों तरफ से चिनार और विलो के पेड़ों से घिरी साफ पानी की यह झील बहुत शांत और सुरम्य है। डल झील की तुलना में छोटी मगर भीड़ से दूर इस झील में आकर शांति का एहसास होता है। नगिन झील में काफी शानदार हाउस बोट हैं जहां रहा जा सकता है।यह झील एक छोटे से रास्ते से जरिए डल झील से जुड़ी है।नगिन से लेकर डल झील तक बोटिंग करने का अलग ही मजा है। नगिन डल झील से करीब 6 किलोमीटर दूर है।

युसमर्ग

युसमर्ग


युसमर्ग
कश्मीर घाटी के बड़गाम जिले में है खूबसूरत युसमर्ग। कश्मीरी में मर्ग का मतलब होता है घास का मैदान। युसमर्ग में जहां तक देखो हरी घास के मैदान नजर आते हैं। मैदानों का साथ देते हैं चीड़ के पेड़ और उन पेड़ों के पीछे से दिखाई देती हैं हिमालय की बर्फ से ढ़की चोटियां। यहां दूर-दूर तक टहलने का मजा लिया जा सकता है। युसमर्ग से एक नदी बहती है जिसे दूधगंगा कहा जाता है। युसमर्ग के पास ही निलनाग झील भी देखी जा सकती है। युसमर्ग श्रीनगर से करीब 50 किलोमीटर दूर है।

दूधपत्री

दूधपत्री

दूधपत्री
कश्मीर घाटी में पीर-पंजाल की पहाड़ियों पर 2700 मीटर की ऊंचाई पर है दूधपत्री। दूधपत्री एक अनजानी सी खूबसूरत जगह है।यहां के दूर-दूर तक फैले हरे घास के मैदान पहली ही नजर में मन मोह लेते हैं। ऐसा लगता है जैसे मखमली गलीचा बिछा हो। दूधपत्री के पास ही एक नदी बहती है। दूर से देखने से इसका साफ पानी दूध जैसा सफेद नजर आता है। घने देवदार के जंगल के बहती यह नदी बहुत सुन्दर नजर आती है। दूधपत्री श्रीनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर है।

बेतला राष्ट्रीय उद्यान

बेतला राष्ट्रीय उद्यान

बेतला राष्ट्रीय उद्यान
देश के पहले नौ टाईगर रिजर्व में से एक है झारखंड का बेतला राष्ट्रीय उद्यान। इसे 1974 में टाईगर रिजर्व में शामिल किया गया था। यहां बाघ और हाथी समेत बहुत तरह के जानवर देखे जा सकते हैं। यहां गर्म पानी के स्रोत और झरने भी हैं। इसी जगंल में ऐतिहासिक पलामू किला भी है। यह किला झारखंड की प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। इसे 16वीं सदी में चेरो राज्य के मेदिनी राय ने बनवाया था। इस किले पर पास एक अधबना किला भी है। बेतला राष्ट्रीय उद्यान रांची से 156 किलोमीटर दूर है।

किरीबुरू

किरीबुरू

किरीबुरू
अगर आपको जंगलों से प्यार है तो किरीबुरू आपके लिए ही है। झारखंड का यह इलाका साल के घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां सारंडा का जंगल एशिया का सबसे बड़ा साल का जंगल है। स्थानीय भाषा में सारंड़ा का मतलब है सात सौ पहाड़ियों का घर। यह जंगल कई तरह के जंगली जानवरों और पेड-पौधों का भी ठिकाना है। यहां उड़ने छिपकली और हाथी मिलते हैं। किरीबुरू की पहाड़ी से सूर्यास्त का शानदार नजारा दिखाई देता है। यह लौह अयस्क की खदानों के लिए भी प्रसिद्ध है। किरीबुरू जमशेदपुर से 160 किलोमीटर दूर है।

पारसनाथ

पारसनाथ


पारसनाथ
जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थान है पारसनाथ पर्वत। पारसनाथ झारखंड के गिरड़ीह जिले में पड़ता है। धार्मिक स्थान होने के साथ पारसनाथ प्राकृतिक सुन्दरता से भी भरा हुआ है। घने जंगलों से घिरा यहां का मुख्य मंदिर झारखंड की सबसे ऊंची पारसनाथ चोटी पर बना है। यह चोटी समुद्र तल से 4480 फीट की ऊंचाई पर है। माना जाता है कि जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ सहित 20 तीर्थंकरों ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था। पर्वत की चोटी तक पहुंचने के लिए 9 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है।पारसनाथ रांची से 150 किलोमीटर दूर है।