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Author: dipanshu

गंगासागर gangasagar

गंगासागर gangasagar

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सुंदरवन
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मुहाने पर है सुन्दरवन। यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डेल्टा और मैंग्रोव वन है। अपने घने और हरे भरे मैंग्रोव जंगलों के लिए प्रसिद्ध सुन्दरवन भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व है। जीव-जन्तुओं, और पक्षियों की सैंकडों प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बाघ यहीं पाये जाते हैं । इन बाघों ने खुद को पानी में रहने के हिसाब से ढाल लिया है। इन्हीं प्राकृतिक विशेषताओं के कारण सुन्दरनवन को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। यह कोलकाता से 112 किलोमीटर दूर है।

सुन्दरवन SUNDARBAN

सुन्दरवन SUNDARBAN

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सुंदरवन
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मुहाने पर है सुन्दरवन। यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डेल्टा और मैंग्रोव वन है। अपने घने और हरे भरे मैंग्रोव जंगलों के लिए प्रसिद्ध सुन्दरवन भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व है। जीव-जन्तुओं, और पक्षियों की सैंकडों प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बाघ यहीं पाये जाते हैं । इन बाघों ने खुद को पानी में रहने के हिसाब से ढाल लिया है। इन्हीं प्राकृतिक विशेषताओं के कारण सुन्दरनवन को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। यह कोलकाता से 112 किलोमीटर दूर है।

मुर्शिदाबाद MURSHIDABAD

मुर्शिदाबाद MURSHIDABAD

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मुर्शिदाबाद
भागीरथी नदी के किनारे बसा है पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक शहर मुर्शिदाबाद। आज भले ही वक्त की दौड़ में यह पिछड गया हो लेकिन किसी समय में यह शहर बंगाल की राजधानी रहा था। नवाबों के दौर में इसने अपने स्वर्णिम काल को देखा। यहां की ऐतिहासिक इमारतों में निज़ामत किला और हज़ारद्वारी महल सबसे प्रसिद्ध है। 1757 में हुई प्लासी की लड़ाई भी इसके पास ही हुई थी। इस लड़ाई में नवाब सिराज-उद-दौला की हार के बाद ही अंग्रेजों का राज्य भारत में स्थापित हुआ था। यह कोलकाता से 182 किलोमीटर दूर है।

विष्णुपुर Bishnupur

विष्णुपुर Bishnupur

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विष्णुपुर
पश्चिम बंगाल के बांकुडा जिले का छोटा सा शहर है विष्णुपुर। मल्ल राजाओं की राजधानी रहे विष्णुपुर में कला, संगीत और स्थापत्य कला की अनूठी शैली का विकास हुआ। वैष्णण मल्ल राजाओं ने यहां अनोखे टेराकोटा मंदिरों का निर्माण करवाया । 17वीं और 18वीं सदी में बने इन अनूठे मंदिरों को टेराकोटा ईंटों से तैयार किया गया है। इसके साथ ही विष्णुपुर बालचुरी साडियों और पीतल की सजावटी वस्तुओं के लिए भी जाना जाता है। यह शहर कोलकाता से 132 किलोमीटर दूर है।

शांतिनिकेतन SHANTINIKETAN

शांतिनिकेतन SHANTINIKETAN

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शांतिनिकेतन
शांतिनिकेतन गुरू रविन्द्रनाथ टैगोर के सपनों की भूमि है । यह जगह बंगाल की कला और संस्कृति का केन्द्र भी है । इस शहर को गुरू रविन्द्रनाथ टैगोर ने बसाया। जहां उन्होंने 1921 में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की। यहां गुरू रविन्द्रनाथ से जुड़े भवनों और उनके संग्राहलय को देखा जा सकता है। यहां आकर शांति और सुकून का अहसास होता है। शांतिनिकेतन का पौष मेला और बसंत उत्सव बहुत लोकप्रिय हैं। यह कोलकाता से 212 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर के पास बसा है ।

गहिरमाथा Gahirmatha

गहिरमाथा Gahirmatha

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गहिरमाथा
ओडीशा का गहिरमाथा समुद्री तट हर साल प्रकृति के एक अद्भुत नजारे का गवाह बनता है। नवंबर के महीने में हजारों की संख्या में विशाल ओलिव रिडले कछुए अंडे देने के लिए इस समुद्री तट पर आते हैं। ये कछुए महासागरों में हजारों किलोमीटर की दूर तय करके यहां पहुंचते हैं। ओलिव रिडले मादा कछुओं की यह खासियत होती है कि वे हर साल एक ही जगह पर अंडे देने के लिए वापस आती हैं। ओलिव रिडले कछुओं की इस खासियत को देखने के लिए बडी संख्या में जीव विज्ञानी और वैज्ञानिक गहिरमाथा पहुंचते हैं।

धौलीगिरी dhauligiri

धौलीगिरी dhauligiri

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धौलीगिरी
भुवनेश्वर के नजदीक ही है धौलीगिरी। यहीं दया नदी के किनारे कलिंग का युद्ध हुआ था। इसी युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। यहां पर सम्राट अशोक का प्रसिद्ध धौली शिलालेख मिला है जिसमें अशोक ने बौद्ध धर्म और उसके दर्शन के बारे में बताया है। धौली शिलालेख के साथ ही चट्टान पर हाथी की मूर्ति उकेरी गई है। यह ओडिशा की शुरूआती बौद्ध मूर्तियों में से एक है। पहाडी पर एक शांति स्तूप भी बना है जिसे 1970 में जापान बुद्ध संघ की तरफ से बनवाया गया था।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएं UDAYAGIRI AND KHANDGIRI CAVES

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएं UDAYAGIRI AND KHANDGIRI CAVES

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खंडगिरी और उदयगिरी गुफाएं
भुवनेश्वर के पास स्थित ये गुफाएं जैन और बौद्ध धर्म से संबंध रखती हैं। पहाडों को काट कर उदयगिरी में 18 और खंडगिरी में 15 गुफाएं बनाई गई । ये गुफाएं ओडीसा की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक जगहों में से एक हैं। इन गुफाओं में जैन और बौद्ध भिक्षु रहा करते थे। अधिकतर गुफाओं का निर्माण राजा खारवेल के समय में हुआ। उदयगिरी की रानी गुंफा दो मंजिला है । उदयगिरी से ही खारवेल का प्रसिद्ध हाथी गुंफा अभिलेख मिला है। ये गुफाएं इतिहास ,धर्म , कला और वास्तुकला की दृष्टि से बहुत अहम हैं।

भुवनेश्वर Bhubaneswar

भुवनेश्वर Bhubaneswar

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वर्तमान ओडिशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर एक प्राचीन शहर है। मंदिरों के इस शहर में बौद्ध, जैन और हिन्दु तीनों ही धर्मों का फैलाव हुआ। लिंगराज मंदिर यहां का प्रसिद्ध मंदिर है। यह शिव मंदिर एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। इस मंदिर की कारीगरी और स्थापत्य कला देखने लायक है। मंदिर के हर पत्थर पर कोई ना कोई कलाकृति उकेरी गई है। माना जाता है कि किसी समय भुवनेश्वर में 7000 मंदिर हुआ करते थे। भुवनेश्वर का राजा-रानी मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है।

चिल्का झील CHILKA LAKE

चिल्का झील CHILKA LAKE

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प्रकृति का नगीना है उड़ीसा की चिल्का झील। यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। समुद्र के किनारे स्थित इस झील में मछलियों और पक्षियों की ढेरो प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें इरावदी प्रजाति की दुर्लभ डाल्फिन देखने को मिलती हैं। इसके साथ ही सर्दियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी चिल्का आते हैं। उड़ीसा का सफर चिल्का को देख बिना पूरा ही नहीं हो सकता। करीब 1100 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली इस झील में बहुत से द्वीप बने हैं। जिनमें कालीजाई देवी के मंदिर वाला द्वीप प्रसिद्ध है।