नैनीताल का सफ़र-(२)
स्नो व्यू से नीचे उतरते ही सामने नजर आती है माल रोड़। मल्लीताल और तल्लीताल को जोड़ती ये सडक हर वक्त पर्यटकों से भरी होती है। लगभग हर हिल स्टेशन पर माल रोड होती है। गोरे साहब इस पर घूमा करते थे, उस समय तो भारतीयों को इस पर आने की इजा़जत भी नहीं थी। लेकिन नैनीताल की ये सड़क दूसरी जगहों की माल रोड से अलग है क्योंकि इसके एक ओर नैनी झील है,जो इस पर घूमने के आनंद…
नैनीताल-झील का जादू
नैनीताल को हम झील का शहर भी कह सकते हैं। नैनीताल भारत के सबसे सुन्दर हिल स्टेशनों में से है। १९३९ मीटर की उंचाई पर बसे नैनीताल को एक अंग्रेज पी बैरन ने १८३९ में खोजा था। नैनीताल से मेरा जुडाव बचपन से ही है। अब तो मुझे खुद भी याद नहीं कि कितनी बार मैं इस मनोरम दुनिया में आ चुका हूं। लेकिन फिर भी मैं यहां जब भी आता हूं मुझे एक नया सा एहसास होता है। शायद…
रानीखेत
रानीखेत की खूबसूरती स्वर्ग से कम नहीं है।रानीखेत उत्तरांचल के सबसे मशहूर हिल स्टेशन में से है।इसलिए यहां आने से पहले मैं सोच रहा था कि ये भी नैनीताल और मसूरी जैसे हिल स्टेशनों की तरह पर्यटकों की भीड से भरा होगा। लेकिन यहां आकर मेरी सोच गलत साबित हुई। आज भी इसने अंग्रेजों के जमाने की अपनी खूबसूरती को बना रखा है। पर्यटकों की भीड़ भी यहां दिखाई नहीं देती। इस पहाडी जगह को अंग्रजों ने १८६९ में बसाया…
कौसानी
कौसानी १८९० मीटर की उंचाई पर एक खुबसूरत हिल स्टेशन है। प्रकृति की गोद में बसा शांत कस्बा। महात्मा गांधी इस जगह की खूबसूरती से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने यहां दो हफ्ते यहां बिताये थे। जबकि वो यहां सिर्फ दो दिन के लिए ही रहने आये थे। इसे देखकर महात्मा गांधी ने कहा था कि जब हमारे यहां कौसानी और कुमायुं के पहाड़ हैं तो लोग स्विटजरलैंड़ क्यों जाते हैं। ये हिल स्टेशन चींड के जंगलों से घिरा है।…
बिनसर की सुबह
बिनसर की सुबह सबसे हलचल भरी होती है। सूरज के उगने से पहले ही सभी लोग रिजोर्ट की छत पर दिखाई देते हैं। सभी लोग बिनसर से दिखाई देने वाले खास नजारे को देखने के लिए यहां जमा होते हैं। ये नजारा है ये यहां से दिखाई देने वाली हिमालय की खूबसूरत बर्फ से ढकी चोटियां। दरअसल बिनसर से हिमालय की केदारनाथ, चौखंबा, त्रिशूल, नंदादेवी, नंदाकोट और पंचोली चोटियों की ३०० किलोमीटर लंबी रेंज दिखाई देती है। जो अपने आप…
बिनसर-कुछ झलकियां
बिनसर- अनछुआ सौंदर्य
जागेश्वर में दो दिन बिताने के बाद मैनें पता किया कि आसपास कोई जगह जो जागेश्वर की तरह ही शांत और खूबसूरत हो। मुझे बिनसर जाने की सलाह दी गई। बिनसर अल्मोडा से लगभग ३४ किलोमी़टर दूर है। जो समुद्र तल से लगभग २३०० मीटर की उंचाई पर बसा है। करीब एक हजार साल पहले ये चांद राजाओं की राजधानी रहा था। अब इसे वन्य जीव अभयारण्य बना दिया गया है। बिनसर झांडी ढार नाम की पहाडी पर है। अयार…
जागेश्वर
जागेश्वर उत्तराखंड में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव है। दिल्ली जैसे महानगर की आपाधापी से दूर एक सुकून भरी शांत जगह। यहां आकर पहाड की असली खूबसूरती को निहारा जा सकता है। ये जगह अल्मोडा से ३० किलोमीटर दूर है । सडक से अच्छी तरह जुडा होने के कारण यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। ये गांव अपने शिव मंदिरो के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक साथ बने हुए १२४ मंदिर हैं, जिनमें मुख्य मंदिर भगवान शिव का…