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Category: Travel postcard

विजयवाड़ा vijaywada

विजयवाड़ा vijaywada

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विजयवाड़ा
कृष्णा नदी के किनारे बसा है आंध्र प्रदेश का ऐतिहासिक शहर विजयवाड़ा। इस प्राचीन शहर में बहुत से मंदिर और गुफा मंदिर हैं। यहां कनक दुर्गा मंदिर की बहुत मान्यता है। मोगलराजपुरम में गुफा मंदिर बनें हैं जिनमें भगवान नटराज और विनायक की मूर्तियां हैं। यहां से बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े अवशेष भी मिले हैं। विजयवाडा के पास ही प्रकाशम बांध बना है जिससे एक खूबसूरत झील का निर्माण हुआ है। विजयवाड़ा हैदराबाद से 275 किलोमीटर दूर है। विजयवाड़ा अपने आमों के लिए भी प्रसिद्ध है।

विशाखापट्टनम visakhapatnam

विशाखापट्टनम visakhapatnam

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विशाखापट्टनम
आंध्र प्रदेश का प्राचीन शहर और प्रसिद्ध प्राकृतिक बंदरगाह है विशाखापट्टनम । विशाखापट्टनम के खूबसूरत समुद्री तट लोगों को अपनी तरफ खीचंते हैं। यह शहर तीन तरफ से हरी भरी पहाडियों और एक तरफ से समुद्र से घिरा है। तीनों पहाडियों पर तीन धर्मों के धार्मिक स्थल बने हैं। शहर का इतिहास छठी शताब्दी ईसा पूर्व से मिलता है। यहां का पनडुब्बी संग्रहालय खास है जहां पनडुब्बी के जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। यह हैदराबाद से करीब 620 किलोमीटर दूर है।

तिरुपति Tirupati

तिरुपति Tirupati

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तिरुपति
भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है तिरुपति । आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरूपति घने जंगलों से ढकी सात पहाडियों से घिरा है। इनमें से एक पहाड़ी पर बना है तिरुपति वेन्कटेश्वर मंदिर । इस मंदिर में दर्शन करने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। भगवान वेन्कटेश्वर को बालाजी भी कहा जाता है। इन्हें भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। तिरुपति वेन्कटेश्वर मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुशैली का सुन्दर उदाहरण है। तिरुपति हैदराबाद से करीब 587 और बेंगलुरु से 260 किलोमीटर दूर है।

अरकू घाटी araku valley

अरकू घाटी araku valley

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अरकू घाटी
पूर्वी घाट के पहाडों पर आंध्र प्रदेश का एक अनछुआ इलाका है अरकू घाटी। समुद्र तल से 1300 मीटर ऊंची अरकू घाटी आंध्र प्रदेश का लोकप्रिय हिल स्टेशन है। यहां के खूबसूरत दृश्य, जंगल, झरने और सुहावनी आबोहवा पर्यटकों को अपनी तरफ खींचते हैं। विशाखापट्टनम से अरकू घाटी का रेल से सफर करने पर इसका पूरा प्राकृतिक सौंदर्य दिखाई देता है। ब्राजगेज रेलवे लाइन पर भारत का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन सिमलीगुड़ा इसी रास्ते पर है। अरकू घाटी विशाखापट्टनम से 114 किलोमीटर दूर है।

लेपाक्षी मंदिर Lepakshi Temple

लेपाक्षी मंदिर Lepakshi Temple

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लेपाक्षी मंदिर
आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी गांव में बना है 16 वीं सदी का लेपाक्षी मंदिर। यह मंदिर अपने झूलते खंबे के अद्भुत आश्चर्य के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मंदिर 70 खंबों पर टिका है जिसमें से एक खंबा जमीन से कुछ ऊपर उठा है। यह कैसे संभव हुआ इसके रहस्य का पता नहीं लगाया जा सका है। विजयनगर शैली में बने इस मंदिर की दीवारों को बारीक नक्काशी और रामायण , महाभारत की कहानिया दर्शाते सुन्दर चित्रों से सजाया गया है। लेपाक्षी हैदराबाद से करीब 500 किलोमीटर दूर है।

कुर्ग coorg

कुर्ग coorg

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कुर्ग
हरी – भरी पहाडियां, धूप छांव का खेल खेलते बादल, जंगल , झरने औऱ कॉफी के बागान कुर्ग को घूमने के लिए खास बनाते हैं। पश्चिमी घाट के पहाडों पर बसा कुर्ग कर्नाटक का एक जिला है। इसका मुख्यालय मडिकेरी समुद्र तल से 1525 मीटर की ऊंचाई पर है। अपनी खूबसूरती और ठंडे मौसम के कारण मडिकेरी को दक्षिण भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। यहां के स्थानीय निवासी कोडवा कहलाते हैं जिनका खान-पान और संस्कृति दक्षिण भारत के दूसरे निवासियों से काफी अलग है। मडिकेरी मैसूर से 125 किलोमीटर दूर है।

गोकर्ण Gokarna

गोकर्ण Gokarna

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गोकर्ण
शांत और साफ-सुथरे सुमुद्री किनारे, हरे भरे जंगल , पहाडियां और धार्मिक तीर्थ स्थान इस सब को मिलाकर बना है कर्नाटक का गोकर्ण। अरब सागर और पश्चिमी घाट के पास बसा यह छोटा सा कस्बा भगवान शिव के प्रसिद्ध महाबलेश्वर मंदिर के कारण धार्मिक तीर्थ स्थान माना जाता है। साथ ही अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के कारण यह जगह सुकून की तलाश में आने वाले पर्यटकों का भी ठिकाना बन रही है। गोकर्ण बेंगलुरु से करीब 500 और मेंगलोर से 210 किलोमीटर की दूरी पर है।

श्रीरंगपट्टनम srirangapatna

श्रीरंगपट्टनम srirangapatna

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श्रीरंगपट्टनम
कर्नाटक का श्रीरंगपट्टनम दक्षिण भारत के इतिहास का अहम हिस्सा है । यह मैसूर का शेर कहे जाने वाले टीपू सुल्तान की राजधानी था। इसकी खासियत है कि यह शहर कावेरी नदी से घिरे एक विशाल टापू पर बना है। 16वीं सदी में बने यहां के किले को भारत के मजबूत किलों में से एक मााना जाता है। यहां का रंगनाथस्वामी मंदिर वैष्णव धर्म का एक प्रमुख मंदिर है जिसे 9वीं सदी में बनवाया गया था । यह जगह मैसूर से 20 और बेंगलुरु से 122 किलोमीटर दूर है।

श्रवणबेलगोला Shravanabelagola

श्रवणबेलगोला Shravanabelagola

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श्रवणबेलगोला
यह एक प्राचीन जैन तीर्थ है। यहां का सबसे बडा आकर्षण है विंध्यागिरी पर्वत पर एक ही पत्थर से बनी भगवान गोमतेश्वर की 57 फुट ऊंची मूर्ति। इसे करीब 1000 हजार वर्ष पहले बनवाया गया था । बारह साल में एक बार मूर्ति का महामस्ताभिषेक किया जाता है जिसमें बडी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। यहां बहुत से प्राचीन जैन मंदिर बने हैं। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म अपनाने के बाद अपना आखिरी समय यहीं बिताया था। श्रवणबेलगोला मैसूर से 88 किलोमीटर दूर है।

मैसूर mysore

मैसूर mysore

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मैसूर
भव्य महलों, मंदिरों और बगीचों का शहर है मैसूर। कनार्टक का यह शहर कला और साहित्य का भी केन्द्र रहा जिसे यहां के वाडेयार राजाओं ने बढावा दिया। मैसूर खासतौर से अपने दशहरा उत्वस के लिए जाना जाता है। 500 साल पुराने इस उत्सव को देखने दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। उस समय रोशनी से जगमगाते मैसूर महल की भव्यता देखते ही बनती है । मैसूर अपनी रेशमी साड़ियों के साथ मैसूर पाक नाम की मिठाई के लिए भी प्रसिद्ध है। यह शहर बेंगलुरु से 150 किलोमीटर दूर है।