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दुबई म्यूज़ियम

दुबई म्यूज़ियम

किसी शहर को जानना समझना चाहते हैं तो उसके इतिहास को समझना भी बहुत ज़रूरी है। इतिहास को जानने के लिए म्यूज़ियम एक सही जगह है। दुबई शहर में भी ऐसा ही म्यूज़ियम है जिसे दुबई म्यू़ज़ियम कहा जाता है। कुछ दशकों पहले तक दुबई मछुआरों, घूमंतू कबीलों और समुद्री किनारे के व्यापार करने की छोटी सी बस्ती हुआ करती थी। लेकिन पिछले 100 वर्षों में दुबई ने तरक्की की नई ऊंचाईयों को छुआ है। रेत से सोना बनाने की दुबई की इस कहानी को समझना चाहते हैं तो आपको दुबई म्यूज़ियम आना होगा।

दुबई म्यूज़ियम

दुबई की सबसे पुरानी बस्ती अल-फ़हीदी इलाके में यह म्यूज़ियम बना है। इसे 200 साल से भी ज़्यादा पुराने अल-फ़हीदी किले में बनाया गया है।यह किला इस इलाके की सबसे पुरानी इमारत है। दुबई खाड़ी के किनारे बना यह छोटा सा किला दुबई की रक्षा के लिए बनाया गया था। यहां का राजपरिवार भी इसी किले में रहा करता था। बाद में दुबई के शहर के विकिसित होने के बाद किले को संरक्षित करके म्यूज़ियम में बदल दिया गया। यहां किले के साथ दुबई के इतिहास को भी संजोया गया है। यहां यह जानकर ताज्जुब होगा कि दुबई के रेगिस्तान में मानव की 5000 हजार साल पुरानी बस्तियां भी मिली हैं। यानि दुबई शहर भले ही नया हो लेकिन यहां कि सभ्यता बहुत पुरानी है।

म्यूज़ियम में जाने के लिए 3 दिरहम का टिकट लगता है। म्यूज़ियम दो हिस्सों में बना है। एक हिस्सा जमीन के ऊपर है । किला छोटा होने के कारण शायद ऊपर इतनी जगह नहीं थी दुबई के पूरे इतिहास को दिखाया जा सके इसलिए बाद में किले की ज़मीन के नीचे म्यूज़ियम के दूसरे हिस्से को बनाया गया। किले के नीचे वाले हिस्सों में पिछले कुछ सौ सालो में दुबई में हुए विकास को विस्तार से समझाया गया है।

ऊपर वाले हिस्से की बात करें तो जैसे ही दुबई म्यूज़ियम के मुख्य दरवाजे के अंदर आते हैं आपको टिकट काउंटर मिलता है। टिकट लेने का बाद आप चौकोर अहाते में पहुंचते हैं। यह अहाता चारों तरफ से ऊंची दीवारों से घिरा है। दीवार के साथ ही दो तरफ लंबे कमरे बने हैं जो शायद रहने के काम आते होंगे। दीवार के तीन कोनों पर तीन बुर्ज़ बने हैं जो सुरक्षा के काम आते होंगे। देखने में किला बहुत छोटा है। अगर भारत के किलों से तुलना करें तो इसे एक तरह की सुरक्षा चौकी कहा जा सकता है। लेकिन 300 साल पुराने छोटे से दुबई के लिए यह काफी कहा जा सकता है। अहाते में दुबई में रहने के पुराने तरीके को दिखाया गया है। यहां घर मुख्यत खजूर की पत्तियों और तने के इस्तेमाल से ही बनाया जाते थे। ये घर गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहते थे। इन घरों में एक मीनार भी बनी होती थी जिसे बरजील कहते थे। यह मीनार गर्मियों में घरों को ठंडा रखने का काम करती थी। बरजील के बारे में जानने के लिए मेरा पुराना लेख- अल-फ़हीदी -दुबई का झांकता इतिहास पढ़ सकते हैं। इसके अलावा अहाते में लकड़ी की नावों को रखा गया था। ये छोटी नावें ही पुराने जमाने में समुद्र में जाने के काम आती थी।

खजूर की पत्तियों से बने पारंपरिक घर

साथ ही ऊपर के कमरों में यहां इस्तेमाल होने वाले संगीत के वाद्ययंत्रों और हथियारों को भी दिखाया गया है। यहां दुबई के कुछ मॉडल रखे गए हैं जिन्हें देख कर पता चलता है कि 200 या 300 साल पहले दुबई कैसा रहा होगा।

सन् 1822 का दुबई

दूसरा हिस्सा ज़मीन के नीचे बना है।यहां दुबई के इतिहास को विस्तार से समझायाा गया है। इसे देखकर पता चलता है कि दुबई की तरक्की में केवल तेल का ही योगदान नहीं है बल्कि तेल की ख़ोज होने से काफी पहले 19 वीं शताब्दी के आखिरी वर्षो में ही दुबई ने व्यापार को बढ़ाने के लिए नीतियां बनानी शुरू कर दी थी। 1894 में ही यहां विदेशी व्यापारियों को टैक्स में रियायत दी जाने लगी थी। लगभग इसी समय दुबई खाड़ी के दोनों किनारों पर बर और देरा इलाके का विकास भी शुरू हो गया था। 1908 में देरा में 350 और बर दुबई के इलाके में 50 दुकाने बन चुकी थी। इस दुकानों में व्यापरी भारतीय मसालों, कपड़ों और सोने की बिक्री किया करते थे। देरा और बर के इन बाज़ारों को आज भी देखा जा सकता है।


दुबई के पास हत्ता में 5000 साल पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं। इसके बाद के वर्षों में भी दुबई के इलाके में हमेशा लोगों के रहने के अवेशष मिले हैं। हत्ता से मिली चीज़ों को भी इस म्यूज़ियम में दिखाया गया है। दुबई में मिले कुछ अवशेष तो यहां की सभ्यता को करीब 7000 साल पीछे ले जाते हैं। सब देखने के बाद म्यूज़ियम में बनी दुकान से आप दुबई से जुड़ी चीजों की खरीदारी करते हुए यहां से बाहर निकल सकते हैं।


इस म्यूज़ियम ने दुबई को लेकर मेरी समझ को काफी बढ़ाया। म्यूज़ियम जैसी जगहों का काम भी यही होता है वे आपको कुछ ऐसा दिखाते हैं जो या तो आपको पता नहीं होता या जो आपको कभी बताया नहीं जाता।

दुबई ट्रैवल गाइड

दुबई ट्रैवल गाइड

अपनी चमक-दमक से दुबई सबको लुभाता है। पिछले कुछ वर्षों में दुबई ने खुद को दुनिया के ट्रैवल नक्शे पर मज़बूती से जमा लिया है। दुनिया भर से लोग यहां घूमने के लिए आते हैं। विदेश घूमने की इच्छा रखने वाले भारतीयों के लिए भी दुबई सही ठिकाना है। दुबई में घूमने से जुड़ी ज़रूरी जानकारी को मैंने इस लेख में समेटने की कोशिश की है।

दुबई वीज़ा-
विदेश जाने के लिए सबसे पहली ज़रूरत होती है उस देश का वीज़ा लेना। बिना वीज़ा के आप किसी दूसरे देश में नहीं जा सकते हैं। भारतीय पार्सपोर्ट रखने वालों के लिए दुबई वीज़ा के नियम आसान हैं। भारत में दुबई का वीज़ा दो तरह से लिया जा सकता है।
1- एयरलाइन्स के ज़रिए- जिस एयरलाइन्स से आप भारत से दुबई जाने का टिकट बुक करते हैं उन्हीं से आपको वीज़ा भी मिल जाएगा। इनके ज़रिए वीजा लेने के लिए कुछ ज़्यादा दस्तावेज़ जमा कराने पड़ते हैं। जैसे की बैंक डिटेल, पिछले 2 साल का आटीआर और फिक्सड डिपोजिट की जानकारी आदि।
2- ट्रैवल एजेंट्स के ज़रिए- इनसे वीज़ा लेना आसान है। आमतौर पर पासपोर्ट की कॉपी और फ़ोटो देने से ही वीज़ा मिल जाता है।
दुबई वीज़ा की ज़्यादा जानकारी के लिए दुबई वीज़ा पर लिखा मेरा पुराना ब्लॉग- भारतीयों के लिए दुबई वीज़ा पढ़ सकते हैं।

कैसे जाएं-
भारत से बहुत सी फुल सर्विस और लो-कॉस्ट एयरलाइन्स दुबई के लिए उड़ान भरती हैं। इनमें एमिरेट्स, एयरइंडिया, जेट एयरवेज़ जैसे फुल सर्विस और फ्लाईदुबई, स्पाइसजेट, इंडिको, एयरइंडिया एक्सप्रेस जैसी लो-कॉस्ट एयरलाइन्स शामिल हैं। अमूमन एयरलाइन्स के हिसाब से 12000 से लेकर 20000 रूपये के बीच भारत के अलग-अलग शहरों से आपको दुबई का रिटर्न टिकट मिल जाता है।
इसके अलावा एयरअरेबिया और एतिहाद जैसी एयरलाइन्स भी हैं जिनसे दुबई के पास के शहरों जैसे शारजहा और अबुधाबी तक पहुंचा जा सकता है। वहां से फिर टैक्सी या बस लेकर आप आसानी से दुबई आ सकते हैं।

अब भारत के कई छोटे शहरों से भी दुबई जाने के लिए सीधी उड़ान मिल जाती है। अपने पास के इंटरनेशनल एयपोर्ट के दुबई के लिए उड़ान की जानकारी ले लें।

होटल-
दुबई दुनिया का जाना-माना पर्यटन स्थल है। इसलिए यहां हर बजट के लोगों के लिए रहने के ठिकाने मिल जाते हैं। यहां दुनिया के सबसे मंहगे होटलों से लेकर डोरमैट्री तक सब कुछ उपलब्ध है। जहां एक मंहगे होटल में आपको कुछ लाख रूपये एक दिन के चुकाने पड़ सकते हैं वहीं डोरमैट्री में आपको 1000-1500 रूपये के बीच सोने के लिए बिस्तर मिल सकता है। आप कैसा होटल चुनना चाहते हैं ये आपको बजट पर निर्भर करता है। वैसे 3000-4000 रूपये प्रतिदिन के बजट में आपको एक अच्छा साफ सुथरा होटल दुबई में मिल सकता है। दुबई में घूमने की अधिकतर जगहें मैट्रो लाइन के आस-पास हैं इसलिए अगर कम बजट में घूमने की इच्छा रखते हैं तो कोशिश करें कि आपका होटल मैट्रो लाइन से पास हो।
बर दुबई ( Bur Dubai) या देरा ( Deria) का इलाका रूकने के लिए एक अच्छा विकल्प है। यहां आपको पांच सितारा से लेकर सस्ते तक हर तरह के होटल मिल जाते हैं और साथ ही ये दोनों इलाके मैट्रो लाइन से भी जुड़े हैं। अगर देरा या बर में आपका होटल काफी सस्ता है तो इस बात का पता कर लें कि कहीं होटल में कोई डांस एरिया तो नहीं है। अक्सर इस तरह के होटल सस्ते मिल जाते हैं । इन होटलों में देर रात तक लोगों का आना जाना और शोर शराबा बना रहता है। अगर आपका कमरा होटल की निचली मंजिल पर हो तो परेशानी हो सकती है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट –

बाहर से दुबई का एक मैट्रो स्टेशन

दुबई में घूमने का सबसे बढ़िया और आसान तरीका है दुबई मैट्रो। मैट्रो लाइन को इस तरह से बनाया गया है कि यह दुबई में घूमने वाली सभी जगहों के आस-पास से निकलती है। अगर जगह कुछ दूरी पर भी है तो उसके नज़दीकी मैट्रो स्टेशन से टैक्सी या लोकल बस ली जा सकती है। दुबई में दो मैट्रो लाइन हैं। इन्हें रेड और ग्रीन लाइन कहा जाता है। रेड लाइन रशिदिया से यूएई एक्सचेंज के बीच चलती है। ग्रीन लाइन एतिसलात से क्रीक स्टेशन के बीच चलती है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट रेड लाइन पर पड़ता है। एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 और 3 मैट्रो लाइन से जुड़े हैं। अगर आप टर्मिनल 2 पर हैं तो वहां से टर्मिनल 1 या 3 के मैट्रो स्टेशन के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं। हर मैट्रो रेल में चार डिब्बे हैं जिसमें पहले डिब्बे का आधा हिस्सा गोल्ड क्लास और आधा हिस्सा महिलाओं और बच्चों के लिए आरक्षित है।
इसके अलावा दुबई में पब्लिक बस, ट्राम, टैक्सी और वॉटर बस से भी सफर किया जा सकता है। दुबई की रीजनल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी इस सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को चलाती है।

आपकी यात्रा का किराया इस बात से निर्धारित होता है कि आपने उस यात्रा के दौरान कितने ज़ोन पार किए हैं। दरअसल दुबई को यात्रा के हिसाब से कुल 7 ज़ोन में बांटा गया है। एक ही ज़ोन के भीतर यात्रा करने पर किराया कम है और जैसे ही आप दूसरे ज़ोन में जाते हैं किराया बढ़ जाता है।

यहां की मैट्रो,बसों, ट्राम में टिकट नहीं होता बल्कि इसके लिए आपको nol card का इस्तेमाल करना होता है। ये कार्ड आप कुछ मैट्रो स्टेशनों, बस स्टेशनों या वेंडिंग मशीन से खरीद सकते हैं।

दुबई के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की पूरी जानकारी के लिए मेरा लेख- पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दुबई कैसे घूमें पढ़ें…

लोकल सिम कार्ड –
दुबई में एतिसलात(Etisalat) और ड्यू (DU) दो कंपनियां हैं जो मोबाइल सर्विस देती हैं। दुबई एयरपोर्ट पर ही दो कंपनियों के काउंटर हैं जहां से सिम कार्ड लिया जा सकता है। दोनों ही कंपनियों में खास पर्यटकों के लिए बने प्रीपेड प्लान आपको मिल जाएंगें।
मैंने दुबई एयरपोर्ट से एतिसलात का पर्यटकों के लिए जारी किया गया विजिटर लाइन प्रीपेड ( टॉक, टेक्सट, सर्फ) प्लान लिया। मुझे 14 दिन के प्लान के लिए 105 दिरहम ( 100 दिरहम प्लान+ 5% वैट) चुकाने पड़े। जिसमें मुझे 40 मिनट का लोकल और इंटरनेशनल कॉल टाइम, 40 एसएमएस, 700 एमबी डेटा और 5 घंटे का फ्री वाई-फाई ( एतिसलात अपने ग्राहकों के लिए दुबई में कई जगह फ्री वाई-फाई की सुविधा देती है, हालांकि मैं इस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाया या तो मुझे इसे इस्तेमाल करना नहीं आया या फिर फ्री वाई-फाई सही से काम नहीं कर रहा था। आप इसके बारे में किसी भी एतिसलात स्टोर से जानकारी ले सकते हैं। ) । एतिसलात के सिम के साथ पर्यटकों को कुछ अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं। जैसे मुझे एक कूपन बुक मिली है जिसमें दुबई के बहुत से रेस्टोरेंट्स, थीम पार्क, एडवेंचर पार्क आदि से जुड़े डिस्काउंट कूपन थे जिनका इस्तेमाल करके पैसे बचाए जा सकते हैं । साथ ही सिम के साथ दुबई की करीम टैक्सी सर्विस से 100 दिरहम तक की एक मुफ्त राइड भी मिली। हालांकि मैं इस टैक्सी सर्विस का इस्तेमाल नहीं कर पाया लेकिन 105 दिरहम के प्लान के साथ 100 दिरहम की मुफ्त टैक्सी राइड बेहतरीन सौदा है। पर्यटकों के लिए बने ये प्लान 14 दिनों के लिए वैध हैं , इससे ज़्यादा दिन होने पर आप फिर से प्लान रिचार्ज करवा सकते हैं। ऊपर बताया 14 दिन का प्लान रिचार्ज करवाने के लिए 75 दिरहम देने होंगे।

अगर एतिसलात की तुलना ड्यू के प्लान से करें को ड्यू के प्लान थोड़े मंहगें हैं। ड्यू में 14 दिन की वैधता वाला पर्यटक प्लान 165 दिरहम का है । जिसके साथ 2 जीबी डेटा और 40 मिनट टॉक टाइम मिलता है। ड्यू के साथ कोई अतिरिक्त फायदा भी नहीं मिलता । इसलिए ड्यू की बजाए एतिसलात ही लेना सही है। लेकिन ये प्लान बदल भी सकते हैं इसलिए आप जब जाएं तो दोनों ही कंपनियों के स्टोर से प्लान की जानकारी लेकर ही सिम खरीदें।

सिम लेने से पहले एक बात पर ध्यान ज़रूर दें कि अब भारत के मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर भी सस्ते इंटरनेशनल रोमिंग प्लान देने लगें हैं। जैसे उदाहरण के लिए एयरटेल की बात करें तो आपको 2999 रूपये में आपको 10 दिन के लिए दुबई रोमिंग प्लान मिल सकता है। जिसके साथ 250 का इनकमिंग कॉल, 250 मिनट कॉल ( भारत में कॉल करने और लोकल कॉल के लिए), 100 फ्री एसएसएस और 3 जीबी डेटा मिलता है। अगर एतिसलात से इसकी तुलना करें तो यह करीब 900 रूपये ज़्यादा बैठता है लेकिन इसमें करीब 6 गुना ज़्यादा कॉल टाइम और चार गुना से ज़्यादा डेटा आपको मिल रहा है। साथ ही आप अपना भारत का नंबर भी चालू रख सकते हैं। इस हिसाब से देखा जाए को यह कोई ज़्यादा कीमत नहीं है।

करेंसी —
संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा है – दिरहम। इसे AED भी लिखा जाता है। जाने से पहले इसे भारत से ही लेकर जाएं या वहां दुबई के एटीएम के इस्तेमाल से भी इसे निकाल सकते हैं। कुछ एटीएम भारतीय एटीएम कार्ड से पैसे निकालने पर अतिरिक्त शुल्क लेते हैं। एटीएम कार्ड इस्तेमाल करते समय आपको एटीएम की स्क्रीन पर इस बारे में जानकारी दी जाएगी कि आपको कितना शुल्क चुकाना होगा। मुझे एक बार 25 दिरहम अतिरिक्त चुकाने पड़े थे। लेकिन कुछ एटीएम से पैसा निकालने का शुल्क नहीं लगता इसलिए अलग-अलग एटीएम में कार्ड लगाकर इसका पता कर लें।
दुबई में डेबिट और क्रेडिट कार्ड लगभग सभी जगह चलते हैं।

क्या देखें-

बुर्ज़- खलीफा- दुनिया की सबसे ऊची इमारत

दुबई आज दुनिया का जाना-माना पर्यटन स्थल है। यहां विशाल मॉल्स, थीम पार्क , एडवेंचर पार्क, रोमांचक खेल, नाइट लाइफ, समुद्री तटों जैसी चीज़ों का मज़ा लिया जा सकता है। अगर खरीदारी का शौक है तो यहां दुबई मॉल, मॉल ऑफ एमिरेट्स और इब्नबतूता मॉल देखे जा सकते हैं। वैसे तो दुबई में मॉल्स की कोई कमी नहीं है। लेकिन ये तीन मॉल्स पर्यटकों की लिस्ट में हमेशा शामिल होते हैं। दुनिया का हर बड़ा ब्रांड आपको यहां मिल जाएगा। दुबई मॉल में ही दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज़-खलीफा भी है। साथ ही दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजिकल फाउन्टेन और सबसे ऊंचा कृत्रिम झरना भी दुबई मॉल में बना है।
दुबई में बहुत से वाटर पार्क, थीम पार्क और एडवेंचर पार्क बने हैं जिन्हें आप अपनी रूचि के हिसाब देख सकते हैं।
सर्दियों में जा रहे हैं तो दुबई मिरेकल गार्डन ज़रुर जाएं।
रोमांचक खेलों का शौक रखते हैं तो दुबई में समुद्री गोताखोरी से लेकर स्काइडाइविंग तक का मज़ा लिया जा सकता है।
समुद्री तटों में यहां का जुमेरिया समुद्री तट बहुत लोकप्रिय है। यही तट के पास ही बुर्ज-अल- अरब होटल भी देखा जा सकता है।
दुबई के पुराने बाज़ार देखना चाहते हैं तो बर दुबई और देरा की तरफ चले जाइए। देरा में आपको गोल्ड सूक, स्पाइस सूक जैसे पुराने बाज़ार देखने को मिलेंगे।
इतिहास में रूचि रखते हैं तो बर दुबई में बना दुबई म्यूजियम और अल-फ़हीदी का इलाका ज़रूर देखें। अल-फ़हीदी दुबई का करीब 150 वर्ष पुराना इलाका है। यहां उस दौर की इमारतों को संरक्षित किया गया है।
अल-फ़हीदी के बारे में जानने के लिए मेरा ब्लॉग – अल-फ़हीदी दुबई का झांकता इतिहास पढ़ें।

दुबई के पास ही आबुधाबी और शारजहा जैसे शहर भी देखे जा सकते हैं। दोनों ही शहरों तक जाने के लिए बस आसानी से मिल जाती है। बस से शारजहा पहुंचने में मुश्किल से एक घंटा लगता है और आबुधाबी 2-2.5 घंटे में पहुंच सकते हैं।

कब जाएं-
दुबई में साल के अधिकतर समय बहुत गर्म रहता है।दिन में तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड के पार ही मिलेगा। दुबई जाने के लिए सबसे अच्छा समय नवम्बर से लेकर फरवरी तक का है। इस समय मौसम कुछ ठंडा होता है और दिन के समय पैदल भी घूमा जा सकता है। लेकिन नवम्बर से फरवरी तक दुबई में होटल मंहगे हो जाते हैं । कुछ कम खर्च में दुबई घूमना चाहते हैं तो कम गर्म महीनों जैसे मार्च, सितम्बर और अक्टूबर में जा सकते हैं। मैं सितम्बर के आखिरी हफ्ते में दुबई गया था। उस समय मौसम गर्म तो था लेकिन फिर भी दिन में पैदल चलने में ज़्यादा परेशानी नहीं हुई।

क्या खाएं-

दुबई में बाकानेरवाला की दुकान का डोसा

दुबई दुनिया का अनोखा देश है जहां लगभग पूरी दुनिया के लोग रहते और काम करते हैं। इसलिए यहां आपको हर जगह का खाना मिल जाता है। चाहे आप किसी बेहतरीन रेस्टोरेंट में खाएं या किसी सड़क किनारे की छोटे सी दुकान पर खाना स्वादिष्ट और साफ-सफाई से बना मिलता है। भारतीय बड़ी संख्या में दुबई में रहते हैं इसलिए भारतीय खाने की यहां भरमार है। किसी अच्छे रेस्टोरेंट में दो लोगों के लिए शाकाहारी भारतीय खाना 50-60 दिरहम में खाया जा सकता है। छोटी दुकानों में आप 15-20 दिरहम प्रति व्यक्ति के बजट में शाकाहारी खाना खा सकते हैं।

इलेक्ट्रिक प्लग –

Type G Socket

दुबई में Type G ( three pin) – प्लग और सॉकेट का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ जगह पर two pin सॉकेट भी मिल जाते हैं। जाते समय अपना ट्रेवल अडैप्टर साथ लेकर जाएं। दुबई में किसी जनरल स्टोर से भी आप यह अडैप्टर खरीद सकते हैं। कुछ होटलों में भी आपको अडैप्टर मिल सकता है।

दुबई से जुड़ी इस जानकारी में आप कुछ जोड़ना चाहें तो ज़रूर बताएं।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दुबई कैसे घूमें ?

पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दुबई कैसे घूमें ?

किसी नई जगह घूमने जाएं तो एक दुविधा होती है कि वहां घूमा कैसे जाए? किस साधन का इस्तेमाल किया जाए? अगर आप कम बजट में सफ़र करना चाहते हैं तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अच्छा कुछ और नहीं हो सकता। जिन शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अच्छा नहीं होता वहां घूमने में काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। दुबई इस मामले में बेहतर शहर है। दुबई का पब्लिक ट्रांसपोर्ट काफी विकसित और व्यवस्थित है। मेरी हाल की दुबई यात्रा में मैंने घूमने के लिए पूरी तरह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही इस्तेमाल किया। इससे ना केवल मैं आराम से घूम पाया बल्कि मेरा बजट भी काबू में रहा।
दुबई में रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट अथोरिटी ( RTA) पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को चलाती है। इसमें मैट्रो, ट्राम, बस, वॉटर बस, अबरा(लकड़ी की नाव) और टैक्सियां शामिल हैं। दुबई समुद्र के किनारा बसा है और शहर के भीतर तक दुबई खाड़ी आने के कारण वॉटर ट्रांसपोर्ट भी यहां विकसित किया गया है। इन सभी के बारे में एक-एक करके बात करेंगे पर पहले बात करते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट के टिकट सिस्टम की।

किराया कैसे निर्धारित किया जाता है-
आपकी यात्रा का किराया इस बात से निर्धारित होता है कि आपने उस यात्रा के दौरान कितने ज़ोन पार किए हैं। दरअसल दुबई को यात्रा के हिसाब से कुल 7 ज़ोन में बांटा गया है। एक ही ज़ोन के भीतर यात्रा करने पर एक समान किराया है और एक से दूसरे ज़ोन में जाने पर किराया बढ़ता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट का टिकट कैसे लें-
यहां की मैट्रो,बसों और ट्राम में सफ़र करने के लिए आपको नोल कार्ड (Nol card) का इस्तेमाल करना होता है। ये कार्ड आप मैट्रो स्टेशन, बस स्टेशन या वेंडिंग मशीन से खरीद सकते हैं।
नोल कार्ड (Nol Card) चार तरह के होते हैं – रेड टिकट ( Red ticket) , सिल्वर कार्ड ( Silver card) , गोल्ड कार्ड ( Gold card), ब्लू कार्ड ( Blue card)। पर्यटक अपनी ज़रूरत के हिसाब से रेड टिकट, सिल्वर कार्ड या गोल्ड कार्ड (मैट्रो के गोल्ड कोच में बैठने के लिए) का इस्तेमाल कर सकते हैं। ब्लू कार्ड का इस्तेमाल दुबई में रहने वाले लोग ही कर सकते हैं।

रेड टिकट –
पर्यटकों के लिए सबसे सही है रेड टिकट। यह कागज़ के सामान्य टिकट की तरह ही होता है। रेड टिकट की कीमत 2 दिरहम होती है।इसमें एक ज़ोन का 4 दिरहम किराया लगता है। यानि अगर आप सिर्फ एक ज़ोन के लिए रेड टिकट चाहते हैं तो आपको कुल 6 दिरहम ( 2 दिरहम टिकट + 4 दिरहम ज़ोन का किराया) चुकाना होगा। आप चाहें तो पूरे दिन का डे पास (Day pass) ले सकते हैं जिसमें 22 दिरहम ( 20 दिरहम डे पास + 2 दिरहम रेड टिकट की कीमत) में आप एक दिन में दुबई के किसी भी ज़ोन में किसी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का जितना चाहे उपयोग कर सकते हैं। इसमें मैट्रो, बस, वॉटर बस और ट्राम शामिल है।अगर पूरे दिन कई जगह जाने का सोच रहे हैं तो डे पास (Day pass) लेना सही रहेगा।
मैं अपनी हर यात्रा के बाद नया रेड टिकट लिया करता है। इस तरह हर बार मुझे टिकट के 2 दिरहम चुकाने पड़ते थे। मुझे बाद में पता चला कि एक रेड टिकट में अधिकतम 10 सिंगल ट्रिप या 5 डे पास रिचार्ज करवाए जा सकते हैं। अगर आप रेड टिकट का इस्तेमाल कर रहें हो तो इस बात की जानकारी टिकट काउंटर से ज़रूर ले लें। इससे आप कुछ दिरहम बचा सकेंगे।

सिल्वर कार्ड-
इसके अलावा पर्यटक सिल्वर कार्ड भी ले सकते हैं। यह प्लास्टिक का कार्ड है।यह कार्ड 25 दिरहम का आता है जिसके साथ 19 दिरहम ट्रिप क्रेडिट मिलता है। इसका मतलब की सिल्वर कार्ड की असल कीमत करीब 6 दिरहम पड़ती है। अगर कुछ लंबा जैसे 7-10 दिन रूकने का सोच रहे हैं तो सिल्वर कार्ड बेहतर रहेगा। सिल्वर कार्ड में घूमने का किराया रेड कार्ड की तुलना में कम है। रेड कार्ड में एक ज़ोन का किराया 4 दिरहम तो सिल्वर कार्ड में यह किराया 3 दिरहम है। दो ज़ोन के बीच यात्रा करने पर रेड कार्ड में 6 तो सिल्वर कार्ड में 5 दिरहम चुकाने होंगे। दो से ज़्यादा ज़ोन होेने पर रेड कार्ड में 8.5 और सिल्वर कार्ड में 7.5 दिरहम का किराया लगेगा। हालांकि सिल्वर कार्ड में डे पास की सुविधा नहीं है। सिल्वर कार्ड 5 साल के लिए वैध होता है इसलिए आप बाद में कभी दुबई जाएं तो अपने खरीदे कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

गोल्ड कार्ड –
दुबई मैट्रो में एक गोल्ड क्लास होती है। इसमें सीटें कुछ बेहतर होती हैं इसलिए किराया भी ज्यादा है। गोल्ड क्लास के लिए आपको या तो गोल्ड कार्ड लेना होगा या फिर गोल्ड क्लास रेड टिकट लेना होगा। ऊपर उदाहरण के लिए जो किराए बताए गए हैं वे मैट्रो के सामान्य डिब्बे या लोकल बस के लिए हैं।

एक जगह से दूसरी जगह जाने के दौरान आप मैट्रो, बस, ट्राम या वॉटर बस में से किसी भी साधन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनके लिए अलग टिकट लेने की ज़रूरत नहीं है और ना ही अलग से किराया लगेगा। ध्यान रखें कि एक ही यात्रा के दौरान दो अलग-अलग साधनों का इस्तेमाल करने के बीच 30 मिनट से ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए और साथ ही आपका कुल सफ़र 3 घंटे में पूरा हो जाना चाहिए। किराया इस पर निर्भर करेगा कि आपने कुल कितने ज़ोन में यात्रा की है।

अब दुबई के पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधनों- मैट्रो, बस, ट्रैक्सी, अबरा, ट्राम और मोनो रेल की बात करते हैं।

1- दुबई मैट्रो-

बाहर से दुबई का एक मैट्रो स्टेशन

दुबई में घूमने का सबसे बढ़िया और आसान तरीका है दुबई मैट्रो। मैट्रो लाइन को इस तरह से बनाया गया है कि यह दुबई में घूमने वाली लगभग सभी जगहों के आस-पास से निकलती है। अगर कोई जगह थोड़ी दूरी पर भी है तो उसके नज़दीकी मैट्रो स्टेशन से टैक्सी या लोकल बस ली जा सकती है। दुबई में दो मैट्रो लाइन हैं। इन्हें रेड और ग्रीन लाइन कहा जाता है।
रेड लाइन रशिदिया(Rashidia) से यूएई एक्सचेंज ( UAE Exchange) के बीच चलती है।
ग्रीन लाइन एतिसलात (Etisalat) से क्रीक ( Creek) स्टेशन के बीच चलती है।

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट रेड लाइन पर पड़ता है। एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 और 3 मैट्रो लाइन से जुड़े हैं। अगर आप टर्मिनल 2 पर हैं तो वहां से टर्मिनल 1 या 3 मैट्रो स्टेशन के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं। हर मैट्रो रेल में चार डिब्बे हैं जिसमें पहले डिब्बे का आधा हिस्सा गोल्ड क्लास और आधा हिस्सा महिलाओं और बच्चों के लिए आरक्षित है।

रेड लाइन पर आने वाली लोकप्रिय जगहें- दुबई मॉल, बुर्ज़ अल अरब, मॉल ऑफ एमिरेट्स, दुबई फ्रेम, इब्नबतूता मॉल, दुबई मरीना

ग्रीन लाइन पर आने वाली लोकप्रिय जगहें- अल-फ़हीदी, बुर्ज़मान, अल-सीफ, अल-घुबाईबा, दुबई म्यूज़ियम, देरा

2 – लोकल बस-
दुबई में घूमने का दूसरा तरीका है लोकल बस का इस्तेमाल करना। लगभग पूरे दुबई में जाने के लिए आपको बस मिल जाती हैं। हालांकि पर्यटकों के लिए कुछ दिन में इसे समझना मुश्किल हो सकता है। इसलिए मैट्रो बेहतर है। लेकिन कहीं-कहीं जाने के लिए बस का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी स्थानीय व्यक्ति या इंटरनेट से अपना बस नंबर पता कर लें और बस स्टेंड से अपनी बस पकड़ लें। बस में टिकट देने के लिए कोई कंडेक्टर नहीं होता। बस में दरवाजे से अंदर जाते समय अपना कार्ड वहां लगी मशीन पर लगा दें जिससे आपकी यात्रा दर्ज़ हो जाती है फिर निकलते समय फिर कार्ड लगा दें और आपकी यात्रा का पैसा कट जाएगा।

अल घुबाईबा बस स्टेशन
दुबई से आबुधाबी की लक्जरी बस

अगर दुबई से आबुधाबी या शारजाह जैसे शहरों में जाना हो तो बस सबसे अच्छा साधन है। दुबई के अल-घुबाईबा ( Al Ghubaiba) और इब्नबतूता मॉल बस स्टेशन से आबुधाबी सेंट्रल बस स्टेशन के लिए सीधी बस मिलती है। आबूधाबी के लिए अल-घुबाईबा ( Al Ghubaiba) से बस नंबर E100 और इब्नबतूता मॉल बस स्टेशन बस नंबर E101 मिलेगी। एक तरफ का किराया 25 दिरहम है। इन एयरकंडीशन आरामदायक बसों में आपको सफर का पता भी नहीं चलता। टिकट के लिए इन बसों में आपको सिल्वर कार्ड लेना ही होगा क्योंकि इनमें रेड टिकट नहीं चलता। तो अगर दुबई में घूमने के दौरान आबुधानी जाने का प्लान है तो दुबई जाते ही सिल्वर कार्ड ले लें और जरूरत के हिसाब से उसे रिचार्ज करवाते रहें।

अल-घुबाईबा ( Al Ghubaiba) से शारजाह के अल जुबैल बस स्टेशन के लिए बस नंबर E306 से जाया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे स्टेशनों से भी शारजाह के लिए बस ली जा सकती है।

दुबई के एयरकंडीशन बस स्टॉप

आप दुबई की बस में सफर करें या ना करें पर एक बार दुबई के बस स्टाप पर ज़रूर जा कर देखे। यहां बसों का इंतज़ार करने के लिए एयरकंडीशन बस स्टॉप बनाए गए हैं। दुबई की गर्मी में इस तरह बस स्टॉप बहुत सुकून देते हैं।

3- टैक्सी-
दुबई में टैक्सी की भी बेहतरीन व्यवस्था हैं । अब इन टैक्सियों को एप के ज़रिए भी बुक किया जा सकता है। वैसे सड़क पर किसी भी टैक्सी को हाथ देकर आप उसमें बैठ सकते हैं। टैक्सी में मीटर 5 दिरहम से शुरू होता है और उसके बाद हर किलोमीटर के करीब 1.75 दिरहम देने होते हैं। कम से कम 12 दिरहम का बिल आएगा। अगर आपका टैक्सी बिल 12 दिरहम से कम है तो भी आपको 12 दिरहम को चुकाने ही होंगें। ट्रैफिक में इंतजार करने का भी कुछ पैसा जोड़ा जाता है। यात्रा खत्म होने पर ड्राइवर आपको स्क्रीन पर आपका फाइनल बिल दिखाएगा और आपको कागज की रसीद भी दी जाएगी। बिना स्क्रीन देखे और रसीद लिए ड्राइवर को पैसे नहीं दें। एक बार ड्राइवर ने बहाना बनाकर मुझे बिल नहीं दिया और ना ही स्क्रीन पर देखने दिया। जब मैंने वापस उसी जगह से टैक्सी ली तो मुझे पता चला की उसने मुझसे करीब 10 दिरहम ज़्यादा ले लिए। हालांकि मेरे साथ ऐसा एक बार ही हुआ लेकिन आप जब भी टैक्सी लें इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि ड्राइवर आपको फाइनल बिल दिखाए।
एयरपोर्ट टैक्सी का मीटर 25 दिरहम से शुरू होता है और उसमें हर किलोमीटर के करीब 2 दिरहम लगते हैं। इसके अलावा दुबई में उबर टैक्सी भी उपलब्ध है।

4- अबरा ( लकड़ी की नाव)-

दुबई की पारम्परिक लकड़ी की नाव- अबरा

दुबई कई सैकड़ों वर्षों से अबरा का चलन है। लकड़ी की बनी पारम्परिक नावों को यहां अबरा कहा जाता है। अबरा यहां के पारम्परिक जीवन को देखने का भी बेहतरीन जरिया है। लकड़ी के पुराने अबरा दुबई खाड़ी में बर दुबई से देरा के बीच चलते हैं। इस सफर में मुश्किल से 4-5 मिनट का ही समय लगता है लेकिन यह सफर आपको फिर से पुराने दौर में पहुंचा देगा।
पुराने अबरा बर दुबई से देरा के बीच दो रूट्स पर चलते हैं।
1- बर दुबई अबरा स्टेशन से देरा ओल्ड सूक अबरा स्टेशन
2- दुबई ओल्ड सूक अबरा स्टेशन से देरा के अल सबकहा अबरा स्टेशन

देरा का अबरा स्टेशन

देरा के पुराना बाज़ारों ( ओल्ड सूक) को देखने के लिए बर दुबई अबरा स्टेशन से अबरा लिया जा सकता है। इन अबरा में 1 दिरहम का टिकट लगता है। अबरा का चलाने वाला ही खुद आकर आपसे पैसे ले लेगा। मुझे ये पुराने अबरा बहुत सुरक्षित नहीं लगे। इन अबरा में मुझे सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट जैसा भी कुछ दिखाई नहीं दिया। लेकिन सफर इतना छोटा है कि डर नहीं लगता।

RTA का अबरा

अगर सुरक्षित अबरा का मज़ा लेना चाहते हैं तो RTA के द्वारा चलाए जा रहे अबरा से जा सकते हैं। इनसे अल घुबाईबा, दुबई ओल्ड सूक ( Dubai old souk) और अल सीफ ( Al Seef) जैसे स्टेशनों से देरा के बनियास (Baniyas) स्टेशन जा सकते हैं। ये पारम्परिक अबरा से तेज़ और सुरक्षित हैं। इनमें आपको लाइफ जैकेट भी मिलती है। इनका टिकट 2 दिरहम है। मैंने अल सीफ से बनियास जाने के लिए अबरा का इस्तेमाल किया।
दुबई मरीना में एयरकंडीशन अबरा भी चलते हैं।

5- ट्राम –

ट्राम का नेटवर्क

ट्राम

दुबई में ट्राम सेवा कुछ वर्ष पहले शुरू की गई है। ट्राम अल सुफोह रोड ( Al Sufouh road) स्टेशन से जुमेरिया बीच रोड ( Jumeirah beach road) स्टेशन के बीच चलती है। दुबई मरीना का इलाका देखने के लिए ट्राम सबसे सही साधन है। ट्राम दुबई मैट्रो के दमाक ( Damac Metro station) और जुमेरिया लेक टॉवर्स मैट्रो स्टेशन ( Jumeirah lake towers metro staion) से जुड़ी है। इसलिए मैट्रो से आसानी से ट्राम में जाया जा सकता है। ट्राम के लिए अलग से कोई टिकट नहीं है। आप अपने मैटो में लिए टिकट या कार्ड का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

6- पाम जुमेरिया मोनो रेल-

मोनो रेल स्टेशन
मोनो रेल

दुबई के पाम जुमेरिया आईलैंड के लिए मोनो रेल शुरू की गई है। मोनो रेल को एक निजी कंपनी चलाती है। मोनो रेल कृत्रिम रूप से बनाए गए पाम आईलैंड को देखने और आईलैंड के आखिर छोर पर बने अटलांटिस होटल और एडवेंचर पार्क तक जाने के लिए बिल्कुल सही है। निजी कंपनी की होने के कारण इसमें Nol card नहीं चलते। आपको अलग से टिकट लेना होता है। मोनो रेल के गेटवे स्टेशन ( Gatewat Station) से अटलांटिस स्टेशन ( Atlantis Staion) तक जाने के लिए एक तरफ का टिकट 20 दिरहम और रिटर्न टिकट 30 दिरहम का है। मोनो रेल का गेटवे स्टेशन ट्राम के पाम जुमेरिया ट्राम स्टेशन से जुडा है। ट्राम से पाम जुमेरिया ट्राम स्टेशन पहंच कर वहां से मोनो रेल ली जा सकती है।

ऊपर बताए इन सभी साधनों का इस्तेमाल करके आप आसानी से दुबई घूम सकते हैं। अगर आप भी दुबई के पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ी कोई जानकारी जोड़ना चाहते हैं तो ज़रूर बताएं।

अल फ़हीदी- दुबई का इतिहास झाँकता है जहाँ….

अल फ़हीदी- दुबई का इतिहास झाँकता है जहाँ….

मिट्टी,पत्थर,लकड़ी के इस्तेमाल से बनी एक मंजिला या दुमंजिला इमारतें। इमारतों के बीच से निकलती पतली सड़कें। इमारतों को ठंडा रखने के लिए बनी ऊंची पुरानी मीनारें किसी भी तरह से दुबई में होने का आभास नहीं देती। जिसने भी आज की आधुनिक दुबई को तस्वीरों या असल में देखा हो अगर उसे आँखें बंद करके इस इलाके में छोड़ दिया जाए तो वह कभी यह नहीं बता पाएगा कि यह दुबई का इलाका है। यही बात अल-फ़हीदी को ख़ास बनाती है। दुनिया के हर विकसित देश की तरह दुबई ने भी सीधे आज के दौर में कदम नहीं रखा। दुबई का भी अपना एक अतीत रहा है और इस अतीत को जानने समझने का एक ज़रिया है- दुबई का अल-फ़हीदी इलाका। यह जगह दुबई के इतिहास से आपको रूबरू करवाती है। मुझे इतिहास से लगाव रहा है इसलिए अपनी हाल की दुबई यात्रा में मैं भी अल-फ़हीदी जा पहुंचा।

क्या है अल-फहीदी—-

अल-फ़हीदी दुबई की शुरूआती बसावटों में से एक है जिसे दुबई खाड़ी के किनारे करीब 150 वर्ष पहले बसाया गया था। उस वक्त दुबई मछुआरों की एक छोटी सी बस्ती हुआ करता था। यहाँ रहने वाले लोग मछलियां पकड़ने और समुद्र से मोती निकालने का काम करते थे। खाड़ी से निकले पत्थरों, जिप्सम और मिट्टी के इस्तेमाल से इन इमारतों को बनाया गया था। क्रीक के किनारे बसे होने के कारण यहां से नावों के जरिए समुद्र में आना-जाना आसान था। फिर दुबई में तेल मिलने में और समुद्री व्यापार में तरक्की होने पर यह जगह पीछे छूट गई।अब दुबई अमीरों की दुनिया थी जहां हर कोई आना चाहता था। इसके साथ ही अल-फ़हीदी में रहने वाले लोगों ने भी इस इलाके को छोड़ दिया। काफी समय तक यूँही पड़ा रहने के बाद दुबई सरकार ने अपने इतिहास की इस धरोहर को संभाला और आज का अल-फ़हीदी हिस्टोरिकल नेबरहुड सामने आया।

अल-फ़हीदी की गलियां

1980 के दशक में अल फ़हीदी के संरक्षण का काम शुरू किया गया था। उस समय इस इलाके को नए सिरे से संवारा गया। आज यहाँ पुराने दौर के करीब 50 घर हैं जिन्हें पुराने तरीके से मरम्मत करके तैयार किया गया है। धीरे-धीरे और भी घरों को ठीक करने का काम किया जा रहा है। यहां के पुराने घरों में आर्ट गैलरी, कैफे, म्यूजियम, हेरिटेज होटल आदि खोले गए हैं जो हर वक्त मेहमानों का स्वागत करने के लिए तैयार रहते हैं। यहां आप दुबई के पुराने जीवन, संस्कृति और रहन-सहन के तरीकों को करीब से देख सकते हैं।

अल-फहीदी में क्या देखें

अल-फ़हीदी में घुसते ही सबसे पहले नज़र पड़ती है शेख़ मोहम्मद सेंटर फॉर कल्चर अंडरस्टैंडिंग ( Sheikh Mohammed Centre for Cultural Understanding ) पर। इस केन्द्र को दुबई की संस्कृति और सभ्यता के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से अल-फहीदी की एक पुरानी इमारत में खोला गया है। सेन्टर की टैग लाइन है “ओपन डोर्स, ओपन माइंड्स ( Open doors, Open minds)”। इस लाइन का मतलब है कि यहां आपका खुले दिल से स्वागत है और आप यहां दुबई की संस्कृति , सभ्यता, रहन-सहन और खान-पान से जुड़े कोई भी सवाल बिना किसी झिझक के पूछ सकते हैं।

मैं सितम्बर के आखिरी हफ्ते में दुबई गया था और वहां खासी गर्मी थी। गर्मी की वजह से सेन्टर का मुख्य दरवाजा बंद था। जैसे ही में दरवाज़ा खोल कर अंदर दाखिल हुआ पारम्परिक कपड़े पहने एक व्यक्ति ने मुस्करा कर मेरा स्वागत किया और तुरंत ठंडा पानी पीने को दिया। उसके बाद उसने मुझे बताया कि इस केन्द्र में क्या- क्या किया जाता है। इस केन्द्र से पर्यटकों के लिए हैरिटेज वॉक चलाए जाते हैं । इन हैरिटेज वॉक के जरिए आप अल-फ़हीदी के इतिहास को समझ सकते हैं। करीब 1.5 घंटे के हैरिटेज वॉक के लिए 100 दिरहम की राशि ली जाती है। इसके साथ ही यहां पारम्परिक अमीराती भोजन भी किया जा सकता है। यहां आप स्थानीय अमीराती भोजन जैसे, सुबह का नाश्ता, दोपहर या रात का खाना और शाम की चाय का मज़ा ले सकते हैं। इसके लिए आपको 120 से लेकर 150 दिरहम के बीच राशि चुकानी होगी।

मैं जब तक यहाँ पहुंचा तब तक हैरिटेज वॉक का समय खत्म हो चुका था इसलिए यहाँ से अल-फ़हीदी के इलाके की जानकारी लेकर मैं खुद ही आगे घूमने के लिए निकल गया। सेन्टर से मुझे अल-फ़हीदी का एक नक्शा दे दिया गया जिसमें यहां के हर घर के बारे में जानकारी और वहां तक पहुंचने का रास्ता समझाया गया था। सेन्टर पर मिले व्यक्ति ने बताया कि हर घर देखने के लिए खुला है, जिसका घर का दरवाजा भी खुला मिले उसमें जाया जा सकता है। घरों में म्यूजियम, आर्ट गैलरी, कैफे, म्यूजियम और होटल जैसी चीजें खोली गई हैं। हां, किसी भी घर में कोई परिवार नहीं रहता। हर घर के आगे नंबर लिए हुए हैं, नक्शे में उस नंबर के घर को खोजते हुए आप आराम से मनचाही जगह पर पहुंच सकते हैं।

दुबई की पारंपरिक नाव डाउ( Dhow)

सेन्टर से आगे बढ़ने पर मैं आस-पास की इमारतों को देखते हुए यहां खाड़ी के किनारे पहुँचा। खाड़ी के किनारे पर दुबई में चलने वाली लकड़ी की नाव को यहां दिखाया गया है। इस लकड़ी की नाव को डाउ (Dhow) कहा जाता है। इन्हीं लकड़ी की नावों के सहारे करीब एक-डेढ़ सदी पहले दुबई में व्यापार की शुरूआत हुई थी। भारत और आस-पास के देशों से इन्हीं नावों के सहारे माल समुद्री रास्ते से दुबई पहुँचता था।


यहीं घूमते हुए एक घर के बाहर मुझे दिखाई दिया आर्किटेक्चरल हेरिटेज एंड एंटिक्वटीज़ डिपार्टमेंट ( Architectural Heritage and Antiquities Department) लिखा दिखाई दिया। नाम से लग रहा था कि यह प्राचीन वस्तुओं की देखभाल से जुड़ी जगह है। यहां अंदर जाने पर मेरी मुलाकात अब्दुल्लानाज़री से हुई। अब्दुल्ला ने मुझे देखते ही हिन्दी में कहा, ‘आप हिन्दुस्तान से हैं। आप तो हमारे भाई जैसे हैं।’

अब्दुल्लानाज़री के साथ मेरा फ़ोटो

अब्दुल्लानाज़री यहां वालंटियर गाइड के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन इसी अल-फ़हीदी की गलियों में बीता है। दुबई के वर्तमान शेख भी उनके ही पड़ोसी थे। बाद में सब लोगों की तरह अब्दुल्लानाज़री का परिवार भी यहां से चला गया। लेकिन अब वे लोगों को यहां के बारे में बताने के लिए वालंटियर गाइड के तौर पर काम करते है जिससे उन्हें बहुत खुशी मिलती है। उनके पुराने घर में अब अरेबियन कॉफी सेंटर चलता है जो काफी मशहूर कैफे है। अब्दुल्ला इस पूरे इलाके को दिखाने के लिए मेरे साथ चल दिए। अब्दुल्ला अपने शौक के लिए गाइड का काम करते हैं और इसके लिए कोई फीस नहीं लेते। सबसे पहले उन्होंने एंटिक्वटीज़ डिपार्टमेंट की इमारत के बारे में ही बताया। समुद्र के किनारे बनी इस इमारत में दुबई के पुराने घरों में बनी सबसे लंबी बालकनी है। बालकनी से खाड़ी का शानदार नजारा दिखाई देता है।

पुराने घरों में सबसे लंबी बालकनी
दुबई खाड़ी के किनारे बसा अल-फ़हीदी

बरजील या कमरा ठंडा करने वाली मीनारें

बरजील- घर ठंडा करने की मीनार

मैं इमारतों के ऊपर बनी मीनारें के बारे में जानना चाहता था। अब्दुल्ला ने बताया कि ये मीनारें पुराने समय के एयरकंडीशन की तरह हैं। इन मीनारों को बरजील (Barjeel) कहा जाता है। इन चौकोर मीनारों में बने खांचों से गर्म हवा बाहर निकलती है और चारों तरफ की ठंडी हवा कमरे के अंदर जाती है और उसे ठंडा रखती है।। आज भी यह सिस्टम बखूबी काम करता है। पुराने समय में खाड़ी देशों में गर्मी के समय इस तरह के मीनारों वाले कमरे और सर्दी के समय मिट्टी, लकड़ी और पत्तियों से बनी छत वाले कमरों का इस्तेमाल किया जाता था। हर घर में इसी तरह दो अलग-अलग तरह के कमरे बनाए जाते थे। घर ठंडा करने के लिए इस तरह की इमारतों को पूरे खाड़ी देशों में बनाया जाता था। दुबई और बहरीन से लेकर ईरान और अफगानिस्तान तक इन्हें बनाया जाता था । प्रचीन मिस्त्र में करीब 5000 वर्ष पहले भी इन्हें बनाने के सबूत पाए गए हैं। दुबई के इलाके में शुरूआत में इन मीनारों और घरों को खजूर की पत्तियों से बनाया जाता था। जिसे बेट अरीश ( Bait Areesh) कहा जाता था। दुबई के देरा इलाके में वर्ष1894 में लगी एक आग में घरों के जल जाने के बाद पत्थर और मिट्टी जैसी आग प्रतिरोधी और ज़्यादा मजबूत चीजों का इस्तेमाल घरों और मीनारों को बनाने में होने लगा।

कॉइन म्यूजियम

अब अब्दु्ल्ला मेरे साथ हो गए थे इसलिए नक्शे को देखने की जरूरत नहीं थी। वे मुझे यहां के कॉइन म्यूजियम में ले गए। इस म्यूजियम में दुबई में चलने वाले प्राचीन सिक्कों को सहेजा गया है। इस तरह के कई म्यूजियम पूरे इलाके में बने हैं। कॉइन म्यूजियम के बाद हमने कॉफी म्यूजियम देखा। कॉफी पीना अरब की संस्कृति का हिस्सा है। इसे दर्शाने के लिए यहाँ एक घर में कॉफी म्यूजियम बनाया गया है। इसमें कॉफी से जुड़ी पुरानी मशीनों और कॉफी बनाने की जानकारी को समेटा गया है। यहां आप कई तरह की कॉफी को पीने का मज़ा भी ले सकते हैं।

कॉफी म्यूजियम

Coffee trivia – कॉफी पीना अरब की संस्कृति का अहम हिस्सा है। यहां किसी के यहाँ जाने पर मेहमानों को कॉफी पेश की जाती है। किसी की पेश की गई कॉफी के लिए मना करना अच्छा नहीं माना जाता है। इसलिए आप अरब में किसी के यहाँ जाएं तो कॉफी पेश करने पर उसके लिए मना ना करें।

XAV आर्ट कैफे

दो सौ साल पहले बनी किले की सुरक्षा दीवार

इसके बाद मैंने कई घरों को देखा जिनमें आर्ट कैफे , आर्ट गैलरी और हेरिटेज होटल खुले हैं। यहां अंदर जाने पर आपको सभी तरह की आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी लेकिन बाहर से देखने पर ऐसा ही लगेगा जैसे अरेबियन नाइट्स के दौर में घूम रहे हैं।
अगर आप दुबई आ रहे हैं और इतिहास में रूचि रखते हैं तो अल-फहीदी आपके लिए बढ़िया जगह हो सकती है। अल-फ़हीदी से ही लगा है दुबई म्यूजियम । दुबई म्यूजियम को अल-फहीदी किले में बनाया गया है। इस म्यूजियम की बात अगले ब्लॉग पोस्ट में।

कैसे पहुंचे— अल-फ़हीदी दुबई के बर दुबई इलाके में पड़ता है। बर दुबई एक महत्वपूर्ण रिहायशी और व्यवसायिक इलाका है। यहां दुबई मैट्रो से आसानी से पहुंचा जा सकता है। अल-फहीदी दुबई मैट्रो के अल-फहीदी स्टेशन से 10 मिनट की पैदल दूरी पर है। अल-फहीदी दुबई मैट्रो की ग्रीन लाइन पर पड़ता है। वैसे रेड लाइन पर पड़ने वाला बुर्ज़मान स्टेनश भी अल-फहीदी के पास ही है। बुर्ज़मान स्टेशन से भी पैदल यहां तक पहुंचा जा सकता है।

क्या देखें– कॉफी म्यूजियम, कॉइन म्यूजियम, आर्ट गैलेरी और आर्ट कैफे। पुराने शहर की गलियों में घूमें। पास ही दुबई म्यूजियम देखना ना भूलें।

कहां ठहरें– अगर हेरिटज होटल में रूकने का मन है तो अल-फ़हीदी में रूका जा सकता है। यहां फिलहाल दो हेरिटेज होटल चलाए जा रहे हैं। एक्सएवी (XAV) यहां का मशहूर हेरिटेज होटल है।

भारतीयों के लिए दुबई वीज़ा

भारतीयों के लिए दुबई वीज़ा

काँच और स्टील से बनी ऊँची इमारतें, चमक-दमक से भरे शॉपिंग माॉल्स और घूमने के लिए एक सुरक्षित ठिकाना होने के कारण दुबई दुनिया में सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले शहरों की सूची में अगले नंबर पर आता है। दुबई जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या भी बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। मुझे ये शहर बहुत पसंद है और पिछले कुछ वर्षों में मैं तीन बार यहाँ जा चुका हूँ। मैं दुबई घूमने के अपने अनुभव साझा करूँ उससे पहले इस लेख में दुबई वीज़ा कैसे मिले इस बारे में बता रहा हूँ।

कैसे लें दुबई वीज़ा

दुबई वीज़ा के लिए आवेदन करने से पहले मुझे यही पता था कि दुबई दुनिया के उन कुछ देशों में से है जो भारतीयों को आसानी से वीज़ा देता है। मैंने जब तलाश करने की कोशिश की तो पता चला कि यह बात सही है तो है लेकिन पूरी तरह नहीं। जानने कि कोशिश करते हैं कि ऐसा कैसे हैं।
दरअसल बात यह है कि दुबई के लिए वीज़ा नियम आसान तो हैं लेकिन वे एक जैसे नहीं है। आप पर कैसे नियम लागू होंगे यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहाँ से वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं। आप को आसान ज़रिया भी मिल सकता है और थोड़ा मुश्किल भी। मुश्किल से मेरा मतलब है कि आपको बैंक डिटेल, इनकम टैक्स रिटर्न या अपनी नौकरी से जुड़े दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।

संयुक्त अरब अमीरात का भारतीय दूतावास सीधे वीज़ा की सुविधा नहीं देता । दुनिया भर में आधिकारिक रूप से अधिकतर देशों के लिए वीज़ा देने का काम देखने वाली कंपनी VFS भारत में केवल उन्हीं लोगों को दुबई वीज़ा देती है जो दुबई की आधिकारिक एयरलाइन्स एमिरेट्स या फ्लाईदुबई के जरिए यात्रा करते हैं। दूसरे लोगों को एयरलाइन्स या एजेंट्स के ज़रिए वीज़ा लेना होता है।

दुबई या संयुक्त अरब अमीरात के लिए ई-वीज़ा की सुविधा है।आप चाहे किसी भी तरीके से वीज़ा लें, आपको किसी ऑफिस या दूतावास में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बस ईमेल से अपने ज़रूरी दस्तावेज़ भेजने के बाद आपको ई-वीज़ा मिल जाता है।

भारतीयों को निम्नलिखित 4 प्रमुख तरीकों से दुबई का पर्यटन वीज़ा मिल सकता है।

1- वीजा ऑन अराइवल
2- एयरलाइन्स के ज़रिए
3- वीज़ा एजेंट्स के ज़रिए
4- ट्रांजिट वीज़ा ( अभी घोषणा लेकिन लागू नहीं)

अब मैं एक-एक करके सभी तरीकों के बारे में आपको बताऊंगा जिसके आपको अंदाजा हो जाएगा कि आपके लिए कौनसा तरीका आसान रहेगा।

1- वीज़ा ऑन अरावल –
इसका मतलब है दुबई एयरपोर्ट पहुँचने पर आपको आसानी से वीज़ा मिल जाएगा। लेकिन इसमें एक शर्त यह है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों के पास पहले से अमेरिका का वैध विजिटर वीज़ा या ग्रीन कार्ड होना चाहिए। इसके साथ ही ब्रिटेन या यूरोपियन यूनियन का रेजिडेंसी वीजा रखने वाले भारतीय भी इस वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा का फायदा उठा सकते है। भले ही यह सबके लिए नहीं लेकिन फिर भी काफी भारतीय इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

फीस- इस सुविधा को लेने के लिए आपको 100 दिरहम का शुल्क चुकाना होगा। साथ में 20 दिरहम का सर्विस चार्ज भी देना होगा।

अवधि- एक बार में 14 दिन का वीज़ा लिया जा सकता है। जिसे 250 दिरहम का शुल्क चुकाकर अगले 14 दिन तक बढ़वाया जा सकता है। वीज़ा बढ़वाने की सुविधा एक ही बार मिलेगी।

2- एयरलाइन्स के ज़रिए-
भारत से दुबई जाने वाली लगभग सभी हवाई कंपनियां अपने ग्राहकों के लिए दुबई वीज़ा दिलवाती हैं। इसके लिए आपको संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट के जरिए आवेदन करना होता है। वीज़ा फीस चुकाने के बाद आपको ईमेल के जरिए ई-वीज़ा मिल जाता है।
अगर आप दुबई की आधिकारिक एयरलाइन्स , एमिरेट्स या फ्लाई दुबई से यात्रा कर रहे हैं तो फिर VFS के जरिए आप दुबई वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। VFS केवल एमिरेट्स या फ्लाई दुबई से रिटर्न टिकट खरीदने वालों को वीज़ा सुविधा देता है।
इसके अलावा भारत से जाने वाली दूसरी एयरलाइन्स जैसे एयरइंडिया, इंडिगो, स्पाइस जेट, जेट एयरवेज़, एतिहाद और एयर एरेबिया भी वीज़ा की सुविधा देती हैं। इसके लिए नियम यह है कि आप जिस एयरलाइन के ज़रिए वीज़ा का आवेदन कर रहे हैं आपके पास उस एयरलाइन का रिटर्न टिकट होना चाहिए।

लेकिन यहीं आकर दुबई वीज़ा लेने की दुविधा शुरु होती हैं। एयरलाइन्स के जरिए वीज़ा का आवेदन करने पर आपको अपने बैंक डिटेल के साथ दो साल का आटीआर या फिक्सड डिपोजिट या पैन कार्ड की जानकारी देनी पड़ती है। अलग -अलग एयरलाइन्स के हिसाब से इनमें कुछ अंतर हो सकता है। जब दूसरे आसान उपाय मौजूद हैं जहां बिना किसी तरह की जानकारी दिए दुबई वीज़ा मिल जाता है ( उसका जिक्र आगे ) तो एयरलाइन्स के ज़रिए वीजा लेने में मुश्किल नियम क्यों रखें गए हैं यह समझ नहीं आया।

अगर आप एमिरेट्स या फ्लाई दुबई के टिकट से यात्रा कर रहे हैं तो इतनी आसानी जरूर मिलती है कि अगर आपने आवेदन करने के पिछले पांच वर्ष के भीतर दुबई की यात्रा की है या आपके पास अमेरिका , ब्रिटेन, यूरोप, जापान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा या स्विटज़रलैंड का वैध वीज़ा है तो आपको किसी तरह की बैंक या आटीआर की जानकारी नहीं देनी पड़ती।

दुबई वीज़ा के लिए इतने अलग नियम क्यों रखे हैं यह समझ नही आता? एक देश जो पर्यटन में दुनिया का अगुआ बनने की इच्छा रखता है वहां एक जैसे नियम होना बेहतर रहता है।

3- वीज़ा एजेन्ट्स के ज़रिए —
दुबई का वीज़ा लेने का सबसे आसान ज़रिया हैं वीज़ा एजेंट्स जो बिना किसी परेशानी के आपको वीज़ा दिला देते हैं। बस आप ईमेल से अपना पासपोर्ट और पासपोर्ट साइज फोटो ( सफेद बैंकग्राउन्ड के साथ ) उनको भेज दीजिए और 2-3 दिन में आपको ईमेल पर वीज़ा मिल जाएगा। हालांकि हर एजेन्ट की वीज़ा फीस में अंतर हो सकता है। मुझे अलग- अलग वीज़ा एजेन्ट की फीस में 500 रूपये तक का अंतर मिला। मोटे तौर पर फिलहाल 6000 रूपये में आप दुबई का वीज़ा ले सकते हैं।

एजेन्ट से वीज़ा लेना आसान तो है लेकिन एजेंट्स भी अपने हिसाब से दस्तावेज मांगते हैं। मैने पहले वीज़ा के लिए Musafir से बात की और उन्होंने केवल पासपोर्ट और फ़ोटो ही मांगा। जबकि अकबर ट्रेवल ने पहले तो केवल पासपोर्ट और फ़ोटो देने को कहा लेकिन बाद में मुझसे नौकरी से जुड़ा और पहचान पत्र मांगा। इसलिए आप अपने हिसाब से कुछ एजेन्टस से बात कर लें। मैंने आखिर में travel2dubai से वीज़ा लिया।

4- मुफ्त ट्रांजिट वीज़ा –
मुफ्त ट्रांजिट वीजा के इस नियम की घोषणा हाल ही में की गई है। इसे लागू करने की तारीख़ के बारे में अभी कुछ नहीं कहा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही यह नियम लागू हो जाएगा। अगर आप भारत से दुनिया के किसी देश में जा रहे हैं और उस दौरान आपको बीच में दुबई से अपनी फ्लाइट बदलनी है तो आप इस सुविधा का फायदा ले सकते हैं। इसके तहत आपको 48 घंटे के लिए दुबई का मुफ्त ट्रांजिट वीजा एयरपोर्ट पर ही दिया जाएगा । इसके लिए शर्त यह है कि आपको आपके पास आपके पास किसी तीसरे देश में जाने का वैध हवाई टिकट होना चाहिए। ये सुविधा पूरी तरह से मुफ्त हैं। आप चाहें तो इसे 96 घंटे के लिए भी यह वीज़ा ले सकते हैं जिसके लिए आपको 50 दिरहम की फीस चुकानी होगी। अगर आप दुबई के रास्ते कहीं जा रहे हैं तो इस आसान और मुफ्त सुविधा का लाभ उठाकर बहुत कम खर्च में दुबई घूम सकते हैं। क्योंकि ध्यान रखिए दुबई के सामान्य टूरिस्ट वीज़ा के लिए आपको ख़ासी रकम खर्च करनी पड़ती है।

OTB ( Ok to Board) – दुबई वीज़ा से जुड़ी एक जरूरी बात है OTB। ध्यान रखिए कि टूरिस्ट वीज़ा पर दुबई जाने वालों को अब OTB की जरूरत नहीं होती। हां, अगर आपके पासपोर्ट पर ECR स्टैम्प है तो आपको टूरिस्ट वीज़ा लेने पर भी OTB करवाना होगा।

जरूरी बेवसाइट-
दुबई वीज़ा से जुडी आधिकारिक जानकारी के लिए यूएई इमिग्रेशन की वेबसाइट- https://government.ae/en/information-and-services/visa-and-emirates-id
यहाँ सभी जरूरी जानकारियाँ आपको मिल जाएंगी। इसके अलावा सभी एयरलाइन्स की वेबसाइट्स और VFS की बेवसाइट पर भी जानकारी मिल जाएगी।

दुबई वीज़ा के लिए कुछ एजेंट्स – musafir.com, akbartravels.com, travel2dubai.com