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Month: March 2017

युमथांग घाटी YUMTHANG VALLEY

युमथांग घाटी YUMTHANG VALLEY

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उत्तरी सिक्किम में 3500 मीटर की ऊंचाई पर है खूबसूरत युमथांग घाटी। इसे फूलों की घाटी भी कहा जाता है। मार्च से मई के बीच यहां चारों तरफ बुरांश के फूल खिले नजर आते हैं। ऊंचे पहाड़ों के बीच बसी युमथांग घाटी किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती । यहां के शिंगबा रोडोडेंड्रेन ( बुरांश ) अभ्यारण्य में बुरांश की 25 किस्में पाई जाती हैं। सर्दियों में यहां काफी बर्फ गिरती है उस समय इस घाटी को देखने का अनुभव सबसे अलग है। यह गंगटोक से 127 किलोमीटर दूर है।

पेलिंग pelling

पेलिंग pelling

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पेलिंग
पश्चिम सिक्किम में बसा एक खूबसूरत पहाड़ी कस्बा है पेलिंग। यहां करने के लिए कुछ नहीं है बस यहां आयें जंगलों में घूमें, विशाल कंजनजंघा को निहारें और प्रकृति की सुन्दरता का आनंद उठाएं। यहां रोमांच पसंद करने वाले पर्यटक काफी आते हैं। यहां से ऊंचे पहाडों के लिए कई तरह के ट्रेक किए जा सकते हैं। पेमयांगस्ते और संगचोएलिंग मठ यहां प्रमुख आकर्षण हैं। यहां रहने वाली जनजातियों की संस्कृति को जानने का भी अलग अनुभव है। पेलिंग गंगटोक से 117 किलोमीटर दूर है।

नाथुला NATHULA

नाथुला NATHULA

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नाथुला
नाथु का मतलब है ‘सुनते हुए कान’ और ला का मतलब है ‘दर्रा’। भारत – और चीन की सीमा पर स्थित नाथूला दोनों देशों की सेना की स्थिति को देखने की बढिया जगह है। सिक्कम आने वाला कोई भी सैलानी शायद ही यहां आना भूलता हो। 14,200 फीट की ऊंचाई वाला यह दर्रा कभी चीन और भारत के बीच व्यापार का प्राचीन रास्ता था। हाल ही में कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए इस दर्रे को खोला गया है। यह दर्रा गंगटोक से 54 किलोमीटर दूर है। यहां पर एक युद्ध स्मारक भी है। पर्यटक पहले से अनुमति लेकर यहां आ सकते हैं।

रूमटेक मठ Rumtek monastery

रूमटेक मठ Rumtek monastery

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रूमटेक मठ को धर्मचक्र केन्द्र भी कहते हैं। यह मठ करमापा लामा का प्रमुख स्थान है। करमापा तिब्बत बौद्ध धर्म के कग्यू मत के प्रमुख हैं। इस मठ को तिब्बत के सूरफू मठ के एवज में बनाया गया क्योंकि सुरफू मठ को 1960 के दशक में चीन में काफी नुकसान पहुचाया गया था। पुरान मठ से लाए गए चित्रों को इस मठ में देखा जा सकता है । रूमटेक मठ के पास ही पुराने रूमटेक मठ और लिंगदम मठ को भी देखा जा सकता है।

गंगटोक Gangtok

गंगटोक Gangtok

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गंगटोक
हरे भरे पहाड़, खुशनुमा मौसम, उगते सूर्य का अद्भुत नजारा और हर जगह आशीर्वाद देता कंजनजंघा पर्वत सिक्किम की राजधानी गंगटोक को अलग ही रूप प्रदान करते हैं। कहते हैं सिक्किम में कंजनजंघा हर जगह मौजूद है। यह आधुनिक शहर अपनी विरासत को भी प्यार से सहेजे हुए है। यहां देखने के लिए मंदिर और बौद्ध मठ हैं। गंगटोक पहाडी शहर होने के बावजूद काफी व्यवस्थित है। साफ सुथरी सड़के और बाजार इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं। एमजी रोड यहां का सबसे लोकप्रिय बाजार है। यहां के ऑर्किड उद्यान में ऑर्किड की सैंकडों किस्मों को उगाया गया है।

कूच बिहार cooch behar

कूच बिहार cooch behar

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पश्चिम बंगाल का शांति और प्राकृतिक सुन्दरता से भरा छोटा सा शहर है कूच बिहार। आजादी से पहले यह एक छोटी रियासत थी। कूच बिहार के राजाओं ने बहुत सी सुन्दर इमारतों का निर्माण करवाया जो पूरे शहर में फैली हुई हैं। इनमें यहां का राजमहल सबसे शानदार है जिसे 1887 में यूरोपिय स्थापत्य शैली के अनुसार बनाया गया था। कूच बिहार अपनी झीलों के लिए भी जाना जाता है। यहां कुल 22 झीलें हैं जिनमें बडी संख्या में प्रवासी पक्षी भी आते हैं। यह शहर बागडोगरा से 150 किलोमीटर दूर है।

दार्जिलिंग Darjeeling

दार्जिलिंग Darjeeling

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दार्जिलिंग
खूबसूरत वादियां, हरे-भरे जंगल, बर्फ से ढके पहाड़, मस्त करने वाली ठंडी हवाएं दार्जिलिंग में वह सब कुछ है जो आपको मंत्रमुग्ध कर दे। अंग्रजी दौर की इमारतें इसकी खूबसूरती और भी निखार देती हैं। इसे ‘क्वीन ऑफ हिलस्टेशन’ भी कहा जाता है। यहां के दूर-दूर तक फैले चाय बागान ऐसे लगते हैं जैसे पहाड़ो ने हरी चादर ओढ रखी हो। चाय बागानों के साथ ही टॉय ट्रेन भी दार्जिलिंग की पहचान के साथ जुड़ चुकी है। इस ट्रेन को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में भी जगह मिली है। यह शहर न्यू जलपाईगुड़ी से 90 किलोमीटर दूर है।

गंगासागर gangasagar

गंगासागर gangasagar

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सुंदरवन
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मुहाने पर है सुन्दरवन। यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डेल्टा और मैंग्रोव वन है। अपने घने और हरे भरे मैंग्रोव जंगलों के लिए प्रसिद्ध सुन्दरवन भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व है। जीव-जन्तुओं, और पक्षियों की सैंकडों प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बाघ यहीं पाये जाते हैं । इन बाघों ने खुद को पानी में रहने के हिसाब से ढाल लिया है। इन्हीं प्राकृतिक विशेषताओं के कारण सुन्दरनवन को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। यह कोलकाता से 112 किलोमीटर दूर है।

सुन्दरवन SUNDARBAN

सुन्दरवन SUNDARBAN

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सुंदरवन
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मुहाने पर है सुन्दरवन। यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डेल्टा और मैंग्रोव वन है। अपने घने और हरे भरे मैंग्रोव जंगलों के लिए प्रसिद्ध सुन्दरवन भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व है। जीव-जन्तुओं, और पक्षियों की सैंकडों प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बाघ यहीं पाये जाते हैं । इन बाघों ने खुद को पानी में रहने के हिसाब से ढाल लिया है। इन्हीं प्राकृतिक विशेषताओं के कारण सुन्दरनवन को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। यह कोलकाता से 112 किलोमीटर दूर है।

मुर्शिदाबाद MURSHIDABAD

मुर्शिदाबाद MURSHIDABAD

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मुर्शिदाबाद
भागीरथी नदी के किनारे बसा है पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक शहर मुर्शिदाबाद। आज भले ही वक्त की दौड़ में यह पिछड गया हो लेकिन किसी समय में यह शहर बंगाल की राजधानी रहा था। नवाबों के दौर में इसने अपने स्वर्णिम काल को देखा। यहां की ऐतिहासिक इमारतों में निज़ामत किला और हज़ारद्वारी महल सबसे प्रसिद्ध है। 1757 में हुई प्लासी की लड़ाई भी इसके पास ही हुई थी। इस लड़ाई में नवाब सिराज-उद-दौला की हार के बाद ही अंग्रेजों का राज्य भारत में स्थापित हुआ था। यह कोलकाता से 182 किलोमीटर दूर है।