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बुरान घाटी ट्रेक- जंगल, बर्फ और ग्लेशियर का अनोखा मेल

बुरान घाटी ट्रेक- जंगल, बर्फ और ग्लेशियर का अनोखा मेल

पहाड़ मुझे हमेशा से पसंद रहे हैं। पहाड़ों को पसंद करने के कारण ही ट्रेकिंग के शौक ने जन्म लिया। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों को पैदल मापने का मज़ा ही अलग है। इस बार गर्मी के मौसम की शुरुआत में ट्रेकिंग के लिए कोई जगह तलाश कर रहा था। खोजबीन के दौरान ही मुझे बुरान घाटी ट्रेक के बारे में पता चला। जब इसके बारे में जानकारी जुटाई को मुझे यह ट्रेक पसंद आया और एक ट्रेकिंग कंपनी से साथ अपना ट्रेक बुक करके मैं बुरान घाटी के लिए निकल गया।

बुरान घाटी हिमाचल के ऊंचे हिमालयी इलाके में पड़ती है और इसके लिए शिमला जिले के जांगिलक गांव से चढ़ाई शुरू करते हैं और यह ट्रेक किन्नौर जिले में जाकर खत्म होता है। मैं दिल्ली से शिमला पहुंचा । अगल दिन शिमला से सुबह-सुबह हमारा पूरा ग्रुप जांगलिक के लिए निकाल गया। जांगलिक शिमला से करीब 150 किलोमीटर दूर है । पहाड़ी रास्ता होने के कारण सफर में समय लगता है। रास्ते में एक बार गाड़ी भी खराब हुई। खैर हम लोग शाम के समय जांगलिक के पास पहुंचे। सूरज डूबने लगा था।जहां गाड़ी ने छोड़ा वहां से जांगलिक के लिए करीब आधा घंटा पैदल चलना था। अगले दिन सुबह ट्रेक का पहला दिन था।

जांगलिक गांव

जागंलिक करीब 9000 फीट की ऊंचाई पर बसा पहाड़ी गांव है। यहां से अगले पड़ाव तक पहुंचने में 5-6 घंटे लगने थे। सुबह करीब 9 बजे हम पहले पड़ाव दायरा के लिए निकल गए। कुछ देर में गांव के बाहर निकलते ही जंगल और बर्फ के पहाड़ दिखाई देने लगे थे। करीब 2 घंटे चलने के बाद हम घने जंगल तक पहुंच गए। ऊंचे – ऊंचे पेड़ों के बीच से रास्ता बनाते हुए आगे चलने में मज़ा आ रहा था। इस ट्रेक की खासियत भी यही है कि इसमें घने जंगल, घास के मैदान और बर्फ सही एक ही ट्रेक में मिल जाती है। दोपहर के समय हम अपने पड़ाव दयारा पहुंचे।
दयारा कैम्प साइट

दयारा एक ख़ूबसूरत बुग्याल ( घास का मैदान ) है। यह मैदान चारों तरफ से बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरा है। इस जगह की सुन्दरता को देखकर पूरी थकान उतर गई। अब हम करीब 11000 फीट की ऊंचाई पर थे। दोपहर के बाद मौसम भी बदलने लगा तेज हवा के साथ बरसात शुरू हो गई। मौसम में ठंड बढ़ने के कारण ज्यादा समय टेंट के अंदर ही बिताना पड़ा। पूरी रात बरसात होती रही । सुबह उठा तो देखा मौसम खुल गया है। हालांकि सुबह ठंड काफी थी। धीरे-धीरे सूरज ने दर्शन देना शुरू किया और सामने की बर्फ से ढकी पहाड़ियों सूरज की रोशनी से चमकने लगीं। सुबह का यह नज़ारा अद्भुत था। कुछ देर बाद तेज़ धूप निकली तो ठंड से भी राहत मिली।

दयारा कैम्प साइट

अब हमारे ग्रुप को दयारा से आगे अपने अगले पड़ाव लिथम के लिए निकलना था। लिथम भी लगभग दयारा की ऊंचाई पर ही था। रास्ता में ज़्यादा परेशानी नहीं हुई। रास्ते में पहली बार बर्फ दिखाई दी। एक पहाड़ी नदी पर बर्फ जमी हुई थी हमें उसी बर्फ के पुल पर चलकर उस नदी को पार किया। लेकिन यह तो बर्फ की शुरुआत थी आगे तो हमें बर्फ पर ही रहना था।


कुछ मैदानों और जंगलों को पास करने के बाद हम लिथम पहुंचे। लिथम भी एक खूबसूरत कैपसाइट थी। दयारा की तरह यहां भी घास का मैदान था लेकिन बर्फ से ढके जो पहाड़ दयारा में कुछ दूरी पर थे वे अब बिल्कुल सामने आ चुके थे। हमारे कैंप साइट के ठीक सामने के पहाड़ बर्फ ढके हुए थे। यहां दो रात के लिए रुकना था। अगले दिन लिथम से चंद्रनाहन झील देखने जाना था। यह झील करीब 13000 फीट की ऊंचाई पर है। लिथम में पता चला कि इस बार सर्दियों में हुई भारी बर्फबारी के कारण जून के महीने में भी झील पूरी तरह जमी हुई है। ये सुनने के बाद झील देखने के उत्साह और भी बढ़ गया। झील तक जाने के लिए बर्फ के कुछ ग्लेशियर पार करने पडे और तीखी चढ़ाई चढ़नी पड़ी। ट्रेक का यह पहला दिन था जब थोड़ी कठिन चढ़ाई से सामना हुआ था। पर यह ट्रेक हमें आगे के मुश्किल सफर के लिए तैयार कर रहा था।

चंद्रनाहन झील

झील पूरी तरह बर्फ से ढकी थी एक छोटा सा हिस्सा था जहां पानी दिखाई दे रहा था। अगले दिन का सफर ज़्यादा मुश्किल था क्योंकि काफी हमें बर्फ पर चलकर ही अगले कैम्प तक पहुंचना था। अगले पोस्ट में बात बुरान घाटी पहुंचने की।…

बुरान घाटी के मेरे Youtube वी़डियो