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नगरकोट

नगरकोट

11 जून 2017
नगरकोट
बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों को देखने के लिए नगरकोट बेहतरीन जगह है। मौसम साफ हो तो यहां से सूरज के उगने का शानदार नजारा दिखाई देता है। समुद्र तल से 2195 मीटर की ऊंचाई पर बसे नगरकोट का मौसम ठंडा रहता है । मैदानों की गरमी से बचने के लिए यह जगह माकूल है। यही कारण है कि नेपाल का यह खूबसूरत पहाड़ी कस्बा पर्यटकों से गुलजार रहता है। नगरकोट नेपाल की राजधानी काठमांडू से 32 किलोमीटर दूर है।

पाटन

पाटन


10 जून 2017
पाटन
काठमांडू के पास ही बसा है ऐतिहासिक पाटन। यह दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से राजधानी रहा। यहां का दरबार चौक काठमांडू घाटी के तीनों दरबार चौकों में सबसे भव्य है। इसके मंदिरों और महलों में लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी का काम स्तब्ध कर देता है। यहां के राजमहल और उससे जुड़े मुल चौक और सुन्दरी चौक के भीतर लकड़ी पर बेहतरीन काम किया गया है। पाटन शहर को बागमती नदी काठमांडू से अलग करती है। यह काठमांडू से 5 किलोमीटर दूर है। पाटन दरबार चौक यूनेस्को विश्व विरासत स्थलो में शामिल है।

भक्तपुर

भक्तपुर

9 जून 2107
नेपाल का ऐतिहासिक शहर है भक्तपुर । यह शहर 12वीं से 15वीं शताब्दी तक नेपाल की राजधानी रहा। लकड़ी पर बारीक नक्काशी के काम की नेवाड़ी कला का बेजोड़ उदाहरण है भक्तपुर। यहां के मंदिरों और महलों पर की गई शानदार नक्काशी से आंखे हटाने का मन ही नहीं करेगा। भक्तपुर की पतली गलियों से निकलने पर हर घर कला का जीता जाता जागता उदाहरण लगता है। यही वजह है कि भक्तपुर के दरबार चौक को यूनेस्को विश्वविरासत स्थलों में शामिल किया गया है। भक्तपुर काठमांडू से 10 किलोमीटर दूर है।

काठमांडू

काठमांडू


8 जून 2017
काठमांडू
नेपाल का सांस्कृतिक, आर्थिक और ऐतिहासिक केन्द्र है काठमांडू। नेपाल की इस राजधानी में भगवान शिव का प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर है। जिसे द्वादश ज्योर्तिलिंगो में सबसे प्रमुख माना जाता है। बडी संख्या में हिन्दु इसके दर्शन करने के लिए काठमांडू आते हैं। यह दुनिया का अनोखा शहर है जिसके आस-पास सात यूनेस्को विश्व विरासत स्थल हैं। पशुपतिनाथ मंदिर के साथ काठमांडू के दरबार चौक, स्वयंभूनाथ मंदिर और बौद्धनाथ स्तूप को यूनेस्को विश्व विरासत स्थलों में शामिल किया गया है। यहां मौज मस्ती और खरीदारों के शौकीनों के लिए यहां थमेल जैसा बाजार भी है।

पोखरा

पोखरा

7 जून 2017

नेपाल का प्यारा और छोटा हिल स्टेशन है पोखरा। पोखरा एक घाटी में बसा है। बडी सी खूबसूरत फेवा झील इसकी खासियत है। इसी झील के एक तरफ पोखरा शहर बसा है। यहां से अन्नपूर्णा की बर्फ से ढकी चोटियां साफ दिखाई देती हैं। ट्रेंकिग जैसे रोमांचक खेलों को पसंद करने वाले के लिए पोखरा पसंदीदा जगह है। यहां से हिमालय के अंदरूनी इलाकों में ट्रेकिंग की जा सकती है। यहां पैराग्लाइंडिग और लाइट एयरक्राफ्ट से उड़ने की भी व्यवस्था है। पोखरा काठमांडू से 150 किलोमीटर दूर है।

लुंबिनी

लुंबिनी


6 जून 2017
लुंबिनी
भारत- नेपाल की सीमा के पास नेपाल में स्थित है महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी । महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली पर मायादेवी मंदिर बना है। इसी जगह पर सबसे प्राचीन बुद्ध विहार के सबूत मिले हैं जिसे ईसा से 600 वर्ष प्राचीन माना जाता है। सम्राट अशोक ने लुंबिनी में स्तूपों और मठों को निर्माण करवाया था। सम्राट अशोक के प्रसिद्ध स्तंभों में से एक लुंबिनी में है जिसमें इस जगह के महात्मा बुद्ध के जन्मस्थल होने की जानकारी दी गई है। लुंबिनी नेपाल की राजधानी काठमांडू से 250 किलोमीटर दूर है। लुंबिनी युनेस्को विश्व विरासत स्थलों में शामिल है।

चितवन नेशनल पार्क

चितवन नेशनल पार्क

5 जून 2017
चितवन नेशनल पार्क
साल के घने जंगलों से ढका है नेपाल का चितवन नेशनल पार्क। एक सींग वाला गैंडा इन जंगलों की शान है। यहां के घास के मैदानों में घूमते गैंडों को देखना अलग ही अनुभव है। इस पार्क ने गैंडों के संरक्षण में मिसाल कायम की है।आज यहां 600 से ज्यादा गैंडें हैं। इसके साथ ही यहां बडी संख्या में बाघ और सैंकडों तरह ही चिडियां भी पाई जाती हैं। नेपाल के इस पहले नेशनल पार्क को 1984 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया। चितवन नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 150 किलोमीटर दूर है।

गोलकुंडा का किला Golkunda fort

गोलकुंडा का किला Golkunda fort

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गोलकुंडा का किला
प्राचीन वास्तुकला के अद्भुत प्रयोग का उदाहरण है गोलकुंडा का किला। किले की खासियत है कि इसके मुख्य दरवाजे के गुंबद के नीचे अगर ताली बजाई जाए तो उसकी आवाज 1 किलोमीटर दूर पहाड़ की ऊंचाई पर बने महल तक सुनाई देती है। गोलकुंडा के वैभव का अंदाजा इस बात से लगया जा सकता है कि विश्वप्रसिद्ध कोहिनूर हीरा गोलकुंडा की खदानों से ही निकला था।16-17 वीं सदी में कुतुबशाही वंश की राजधानी रहे गोलकुंडा में उस दौर के महल, इमारते और मस्जिदें अभी भी देखी जा सकती है।यह किला हैदराबाद के बेहद नजदीक है।

श्री शैलम SRISAILAM

श्री शैलम SRISAILAM

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श्रीशैलम
आंध्रप्रदेश के कुर्नूल जिले में है श्री शैलम। यह शहर नल्लामल्ला की पहाड़ियों पर स्थित है। यहां भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक है इसलिए इस मंदिर की बहुत मान्यता है। भगवान शिव को यहां मल्लिकार्जुन स्वामी कहा जाता है। वर्तमान मंदिर को विजयनगर साम्राज्य के राजा हरिहर राय ने करीब 6 शताब्दी पहले बनवाया था। कृष्णा नदी पर बना विशाल श्री शैलम बांध भी देखने लायक है। श्री शैलम हैदराबाद से 212 किलोमीटर की दूरी पर है।

बोर्रा गुफाएं Borra Caves

बोर्रा गुफाएं Borra Caves

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बोर्रा गुफाएं
बोर्रा गुफाएं आंध्र प्रदेश की अनंतगिरी पहाडियों में स्थित है। इन्हें भारत की सबसे बडी प्राकृतिक गुफाओं में से एक माना जाता है। करीब 200 मीटर गहरी ये गुफाएं हजारों वर्षों तक पानी के कारण चूना पत्थर की चट्टानों के कटने से बनी हैं। चूना मिले पानी के टपकने से गुफाओं में बहुत सी आकृतियां बन गई हैं। स्थानीय जनजातियां इस गुफा को पवित्र मानते हैं और इसमें बने शिवलिंग की पूजा करते हैं। इनमें 30 से 50 हजार वर्ष पुराने पत्थर के औजार भी मिले हैं। ये गुफाएं विशाखापट्टनम से 90 किलोमीटर दूर हैं।