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Category: Travel postcard

तंजावुर THANJAVUR

तंजावुर THANJAVUR

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तंजावुर
तमिलनाडु के इस ऐतिहासिक शहर को मंदिरों की नगरी कहा जाता है। तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर तमिल वास्तुकला का सबसे बडा उदाहरण हैं। 11 वीं शताब्दी में चोल शासक राज राजा चोल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर की 66 मीटर ऊंची मीनार पर 80 टन वजन का पत्थर रखा है। इतने विशाल मंदिर का निर्माण उस समय के कला , कौशल और विज्ञान की प्रगति को दिखाता है। यूनेस्को ने इस मंदिर को विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है।

महाबलिपुरम् Mahabalipuram

महाबलिपुरम् Mahabalipuram

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महाबलिपुरम्
दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक नगर है महाबलिपुरम्। सांतवी शताब्दी में पल्लव राजाओं के समय यह अपने स्वर्णिम काल में था। उस समय बने मंदिर, गुफाएं और कलाकृतियां स्थापत्य की दृष्टि से बेहतरीन मानी जाती हैं। यहां का शोर मंदिर अपनी द्रविड वास्तुशैली के लिए जाना जाता है। एक ही पत्थर से बना पंचरथ मंदिर और पत्थरों पर उकेरे गए चित्र महाबलिपुरम् को अलग ही रूप देते हैं। पंचरथ मंदिर का नाम पांच पांडवों के नाम पर पडा है। यह चैन्नई से करीब 60 किलोमीटर दूर है।

माथेरान Matheran

माथेरान Matheran

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माथेरान
मुंबई के पास प्राकृतिक सुन्दरता से भरा हिल स्टेशन है माथेरान। इसकी खोज 1854 में ठाणे के कलेक्टर ह्यूज मलेट ने की थी। ज्वल जतंपद यहां पहुंचने का एक बेहतर जरिया है। पहाड़ी ढलानों पर चढ़ती उतरती ट्रेन से रास्ते की खूबसूरती का मजा लिया जा सकता है। मोटर गाडियां लाने पर रोक होने के कारण कुछ दिन शांति से बिताने के लिए माथेरान बेहतरीन जगह है। इस दैनिक series के sponsor The Byke Hospitality Ltd का रिजॉर्ट The Byke Heritage भी यहीं हैं। यह रिजॉर्ट माथेरान की पहली इमारत है जिसे ह्यूज मलेट ने बनाया था।

महाबलेश्वर Mahabaleshwar

महाबलेश्वर Mahabaleshwar

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महाबलेश्वर
ऊंची चोटियां, हरे-भरे जंगल, घाटियां और पानी से भरे झरने महाराष्ट्र के प्रसिद्ध हिल स्टेशन महाबलेश्वर की खासियत हैं । पश्चिम घाट की पहाडियों पर 1438 मीटर की उंचाई पर बसे महाबलेश्वर की आबोहवा बेहद सुहावनी है। मानसून के समय तो इसकी खूबसूरती की तुलना ही नहीं की जा सकती। इसको पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है। महाबलेश्वर के पास ही प्रतापगढ का किला है जिसकी मराठा इतिहास में बडी भूमिका है। इसी किले के पास शिवाजी महाराज ने अफजल खान को मौत के घाट उतारा था। महाबलेश्वर मुंबई से करीब 250 किलोमीटर दूर है।

पुणे Pune

पुणे Pune

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पुणे
मराठा साम्राज्य का प्रमुख शहर और पेशवाओं की राजधानी रहे पुणे को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। यह शहर मुला और मुथा दो नदियों के किनारे बसा है। मराठा साम्राज्य के वैभव की झलक यहां के शनिवार वाडा में देखी जा सकती है जो पेशवाओं के रहने का स्थान था। शहर में ही दगडूशेठ का प्रसिद्ध गणपति मंदिर है। इसके अलावा पुणे शहर के पास प्राकृतिक सुन्दरता से भरी जगहों की भी कोई कमी नहीं। शिवाजी महाराज के समय का सिंहगढ़ का किला भी पुणे के पास ही है।

नासिक nasik

नासिक nasik

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नासिक
महाराष्ट्र का यह शहर प्राचीन समय से ही धर्म और आस्था का केन्द्र रहा है। हर बारह साल पर होने वाले कुंभ मेले के चार स्थानों में से नासिक एक है। नासिक में गोदावरी के तट पर यह कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही माना जाता है कि यही पंचवटी में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ने कुछ समय बिताया था । नासिक की अंगूर की खेती के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है। यहीं शहर के बाहर अंगूर के बडे-बडे बगीचे देखे जा सकते हैं। नासिक मुंबई से करीब 180 किलोमीटर दूर है।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर Trimbakeshwar Temple

त्रयम्बकेश्वर मंदिर Trimbakeshwar Temple

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त्रयम्बकेश्वर मंदिर
त्रयम्बकेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक है। इस कारण हिन्दु धर्म में इस मंदिर का बहुत महत्व है। त्रयम्बकेश्वर मंदिर भारत की प्राचीन स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। मंदिर से कुछ दूरी पर ब्रह्मगिरी पर्वत है जहां से पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम होता है। गोदावरी को ‘दक्षिण की गंगा’ भी कहा जाता है। माना जाता है कि गौतम ऋषि की तपस्या के कारण यहां गोदावरी प्रकट हुई थी। इसलिए गोदावरी को ‘गौतमी गंगा’ भी कहा जाता है। त्रयम्बकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक शहर से 30 किलोमीटर दूर है।

औरंगाबाद Aurangabad

औरंगाबाद Aurangabad

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औरगांबाद
महाराष्ट्र का ऐतिहासिक शहर है औरंगाबाद। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण मध्यकाल में हर बादशाह या राजा ने इस पर अपना कब्जा करना चाहा। इसी कारण यह इलाका ऐतिहासिक इमारतों से भरा पडा है। मुगल बादशाह औंरगज़ेब ने यहां लंबा वक्त बिताया था । बीबी का मकबरा यहां की सबसे लोकप्रिय इमारत है जिसे ताजमहल की नकल माना जाता है। औरंगाबाद से कुछ ही दूरी पर दौलताबाद का किला है जहां मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली से ले जाकर अपनी नई राजधानी बसाई थी। एंजता और ऐलोरा की गुफाएं भी औरंगाबाद शहर के पास ही हैं।

कैलाश मंदिर, ऐलोरा Kailash temple

कैलाश मंदिर, ऐलोरा Kailash temple

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कैलाश मंदिर, ऐलोरा
भारत के प्राचीन ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की उन्नति की एक झलक देखनी हो तो बस कैलाश मंदिर को देख आइए। महाराष्ट्र के ऐलोरा गुफा समूहों के साथ बना यह शिव मंदिर अद्भुत है जिसे पूरी पहाडी को तराश कर बनाया गया है। आज से करीब 1300 वर्ष पहले बिना आधुनिक औजारों के विशाल मंदिर का निर्माण किया जाना कारीगरी की महानता है। अनुमान लगाया गया है कि इसके निर्माण में करीब 40 हजार टन के पत्थरों को यहां से काट कर हटाया गया होगा। यह मंदिर औरंगाबाद शहर के पास है।

कसारगोड Kasaragod

कसारगोड Kasaragod

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कसारगोड
केरल के बिल्कुल उत्तर में बसा है कसारगोड। खूबसूरत और शान्त समुद्री तट कसारगोड की पहचान है। पर्यटकों की हलचल से दूर कसारगोड एक शांत पर्यटक स्थल है। जहां देखने के लिए समुद्री तटों के अलावा ऐतिहासिक किले और इमारतें भी हैं। यहां के बैकवाटर में हाउसबोट की सैर और उसमें रात बिताने का मजा लिया जा सकता है। पर्यटन के नक्शे पर कसारगोड धीरे – धीरे पहचान बना रहा है। कसारगोड त्रिवेंद्रम से करीब 560 किलोमीटर की दूरी पर है।