Browsed by
Category: Travel postcard

दमदमा साहिब

दमदमा साहिब


दमदमा साहिब
तख्त़ श्री दमदमा साहिब सिक्ख धर्म के पांच तख्‍त़ों में से एक है। भटिंडा के पास तलवंडी साबो में यह स्थित है। गुरू गोविंद सिंह ने मुक्तसर की लड़ाई के बाद यहां कुछ देर आराम किया था इसलिए इस जगह का नाम दमदमा पड़ा। गुरू गोविंद सिंह जी ने इसे सिक्ख शिक्षा के केन्द्र के रूप में विकसित किया और यहीं पर उन्होंने गुरू ग्रंथ साहिब को पूरा किया था। यहां गुरूद्वारे के दर्शन के साथ बुर्ज़ बाबा दीप सिंह भी देखी जा सकती है। दमदमा साहिब भटिंडा से 28 किलोमीटर दूर है।

गुरदासपुर

गुरदासपुर


गुरदासपुर
रावी और सतलुज नदियों के बीच बसा है पंजाब का ऐतिहासिक और धार्मिक शहर गुरदासपुर। यहां पाकिस्तान की सीमा पर रावी नदी के किनारे डेरा बाबा नानक है । सिक्खों के प्रथम गुरू, गुरू नानक देव जी यहां रहे थे और उन्होंने उपदेश दिए थे। डेरा बाबा नानक में गुरूद्वारा दरबार साहिब बना है। कलानौर वह जगह है जहां मुगल बादशाह अकबर का राज्याभिषेक किया गया था। हरगोविन्दपुर कस्बे में गुरू की मस्जिद है जो सर्वधर्म सम्भाव की मिसाल है । इस मस्जिद को छठे सिक्ख गुरू, गुरू हरगोविन्द जी ने बनवाया था। गुरदासपुर अमृतसर से 80 किलोमीटर दूर है।

कपूरथला

कपूरथला

कपूरथला
पंजाब के कपूरथला शहर को सुन्दर इमारतों, सड़कों और बगीचों के लिए जाना जाता है। जैसलमेर के राणा कपूर ने 11वीं शताब्दी में इस शहर की स्थापना की थी। 20वीं सदी की शुरूआत में महाराजा जगजीत के समय यहां बहुत सी इमारतों का निर्माण हुआ। इन इमारतों में फ्रेंच, भारतीय-इस्लामी और सिक्ख स्थापत्य का मेल दिखाई देता है। जगजीत पैलेस इस दौर की बेहतरीन इमारत है। मोरक्को की कुतबिया मस्जिद के आधार पर बनी मूरिश मस्जिद और पंज मंदिर यहां की दूसरी खूबसूरत जगहें है। कपूरथला अमृतसर से 70 किलोमीटर दूर है।

फिरोज़पुर

फिरोज़पुर


फिरोजपुर
भारत-पाकिस्तान की सीमा पर सतलुज नदी के किनारे बसा है पंजाब का फिरोजपुर। यह सिक्ख इतिहास की अहम जगह है। फिरोजपुर के हुसैनीवाला में क्रांतिकारी भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू का अंतिम संस्कार किया गया था। उनकी याद में यहां शहीद स्मारक बनाया गया है। हुसैनीवाला में भारत-पाकिस्तान सीमा पर शाम के समय बीटिंग रिट्रीट समारोह देखा जा सकता है। यहीं दो अंग्लो-सिक्ख लड़ाईयां हुई थी । लड़ाई से जुड़े संग्रहालय में उससे जुड़ी जानकारी ली जा सकती है।फिरोजपुर का सारागढ़ी गुरूद्वारा भी सिक्ख वीरता को समर्पित है।फिरोजपुर अमृतसर से करीब 100 किलोमीटर दूर है।

पटियाला

पटियाला

पटियाला
पंजाब की एक प्रमुख रियासत थी पटियाला। यह शहर कला और स्थापत्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता था। यहां की इमारतों में भारतीय, इस्लामी और यूरोपीय शैली का मेल दिखाई देता है। किला मुबारक यहां का सबसे पुराने किला है। इसी के चारों तरफ पटियाला शहर का विकास हुआ। किला मुबारक के दरबार हॉल में एक संग्रहालय भी बना है जिसमें हथियारों का बेहतरीन संग्रह रखा गया है। यहां शीश महल में एक और संग्रहालय है जहां पंजाब, कश्मीर, बर्मा और तिब्बत की कलाकृतियां देखी जा सकती हैं। पटियाला दिल्ली से करीब 250 किलोमीटर दूर है।

अमृतसर

अमृतसर

अमृतसर
सिक्ख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण शहर है अमृतसर। सिक्ख धर्म में सबसे पवित्र जगह स्वर्ण मंदिर गुरूद्वारा अमृतसर में ही है। गुरू अर्जनदेव ने स्वर्ण मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था। स्वर्ण मंदिर के पास ही जलियावालां बाग में शहीद स्मारक के दर्शन किए जा सकते हैं। 16वीं सदी में बसाया गया अमृसतर एक समय बहुत बड़ी व्यापारिक मंडी हुआ करता था। जहां कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक व्यापार किया जाता था। यहां के पुराने बाज़ारों में उस समय की महक को महसूस किया जा सकता है। अमृतसर आएं तो यहां का खाना जरूर खाएं।

आनंदपुर साहिब

आनंदपुर साहिब

आनंदपुर साहिब
सिक्ख धर्म के प्रमुख स्थानों में से एक है आनंदपुर साहिब। सिक्ख धर्म के पांच प्रमुख गुरूद्वारों में से एक यहीं है। इसे श्री तख़्त केशगढ़ साहिब कहा जाता है। दसवें गुरू, गुरू गोविंद सिंह जी ने सन् 1699 में बैसाखी के दिन यहीं खालसा की स्थापना की थी। यहां गुरू गोविंदसिंह जी से जुड़ी चीजें रखी गई हैं।आनंदपुर में मनाए जाने वाला होला-मोहल्ला का त्योहार बहुत प्रसिद्ध है। दुनिया भर से श्रद्धालु इस त्योहार में हिस्सा लेने के लिए आनंदपुर साहिब पहुंचते हैं। आनंदपुर साहिब चंड़ीगढ़ से करीब 80 किलोमीटर दूर है।

कोलकाता

कोलकाता

कोलकाता
पश्चिम बंगाल की पहचान है कोलकाता। कोलकाता को सिटी ऑफ जॉय भी कहा जाता है। कोलिकाता, सुतानाती और गोविन्दपुरी इन तीन गांवों को मिलाकर जॉब चारनोक में 1690 में कोलकाता की नींव रखी थी। हुगली नदी के किनारे बसा कोलकाता आज भारत के सबसे बड़े महानगरों में से एक होने के साथ ही बंगाल की कला और संस्कृति की पहचान भी बन चुका है। औपनिवेशिक दौर की इमारतें, संग्रहालय, कला दीर्धाएं और बाजार यहां बहुत कुछ देखा जा सकता है। कोलकाता का खाना भी अपनी अलग पहचान रखता है। आखिर रसगुल्ले की खोज कोलकाता में ही हुई थी।

अलीपुरद्वार

अलीपुरद्वार

अलीपुरद्वार
पश्चिम बंगाल के खूबसूरत डुअर्स इलाके का बड़ा हिस्सा अलीपुरद्वार में ही आता है। भूटान, गंगटोक और दार्जिलिंग का रास्ता यहीं से होकर जाता है। चाय बागानों से घिरे इस इलाके में घने जंगल भी हैं। जैव विविधता से भरे इन जंगलों में घूमने का अलग ही मजा है। यहां बाघ, गैंड़ा और हाथी जैसे जानवरों को देखा जा सकता है। इसके अलावा तरह-तरह के पक्षी भी इन जंगलों में बहुत मिलते हैं। यहां जलदापारा वन्यजीव अभ्यारण्य और बुक्सा टाईगर रिजर्व की सैर की जा सकती है। यह बागडोगरा से करीब 145 किलोमीटर दूर है।

नवद्वीप

नवद्वीप

नवद्वीप
गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थान है पश्चिम बंगाल का नवद्वीप। भागीरथी नदी के किनारे बसा नवद्वीप भक्तिकाल के प्रमुख संत भगवान चैतन्य की जन्मस्थली है। चैतन्य ने कृष्ण भक्ति को लोकप्रिय बनाया। मध्यकाल में नवद्वीप ज्ञान और दर्शन का बहुत बड़ा केन्द्र था। यहां संस्कृत , न्याय और तर्क शास्त्र की शिक्षा दी जाती थी। यहां कई प्राचीन मंदिर देखे जा सकते हैं। नवद्वीप के पास मायापुर है जहां इस्कान का मुख्यालय है। नवद्वीप में होली के दिन चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिन पर विशाल रथयात्रा निकाली जाती है। नवद्वीप कोलकाता से 127 किलोमीटर दूर है।