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रांची

रांची

रांची
झारखंड राज्य की राजधानी है रांची। छोटा नागपुर के पठार का हिस्सा होने के कारण यहां प्राकृतिक सुन्दरता भी बहुत है। रांची को झरनों का शहर भी कहा जाता है।रांची के पास देखने के लिए कई खूबसूरत झरने हैं।यहां पास ही कांची नदी 144 फीट की ऊंचाई से गिरते हुए दशम झरने का निर्माण करती है।वहीं स्वर्णरेखा नदी पर बना हुंडरू झरना 320 फीट ऊंचा है।मानसून में इन झरनों का देखने का अलग ही मजा है। देश के हर इलाके से आसानी से रांची पहुंचा जा सकता है।

नेतरहाट

नेतरहाट


नेतरहाट
झारखंड का प्यारा सा हिल स्टेशन है नेतरहाट। इसे छोटा नागपुर की रानी भी कहा जाता है। समुद्र तल से 3700 फीट की ऊंचाई पर स्थित नेतरहाट प्राकृतिक सुन्दरता से भरी जगह है। नेतरहाट आकर शांति का अहसास होता है। जंगलों से घिरे नेतरहाट का सूर्योदय और सूर्यास्त देखने लोग यहां आते हैं। यहां आस-पास कई सुन्दर झरने देखे जा सकते हैं। इनमें लोध झरना प्रसिद्ध है 466 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना बहुत शानदार नजर आता है। नेतरहाट अपने आवासीय विद्यालय के लिए प्रसिद्ध है। नेतरहाट झारखंड की राजधानी रांची से 156 किलोमीटर दूर है।

निज़ामाबाद

निज़ामाबाद


निज़ामाबाद
निज़ामशाही के दौर में निज़ामाबाद शहर का बहुत विकास हुआ। निज़ामाबाद का किला यहां की सबसे लोकप्रिय इमारत है। इस किले को 10वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजाओं ने बनवाया। किले के भीतर ऊंची पहाड़ी पर रामुलवारी मंदिर है जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने बनवाया था। निज़ामाबाद के पास ही डोमाकोंडा गांव में डोमाकोंड़ा किला है । 18वीं सदी में बना यह किला मुगल और पश्चिमी वास्तुकला का मेल है। किले में एक सुन्दर महल और काकतीय राजवंश के समय का शिव मंदिर देखा जा सकता है। निज़ामाबाद हैदराबाद से 175 किलोमीटर दूर है।

धुलिकट्टा

धुलिकट्टा

धुलिकट्टा
तेंलगाना के बौद्ध इतिहास से जुड़ी अहम जगह है धुलिकट्टा। करीब दो हजार वर्ष पहले धुलिकट्टा में महास्तूप और विहार का निर्माण किया गया था। उस समय के अवशेष यहां देखे जा सकते हैं। यहां से रोमन और सातवाहन काल के सिक्के और चांदी के आभूषण भी मिले हैं। स्तूप को बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए चूना पत्थरों पर बौद्घ धर्म से जुड़ी आकृतियां उकेरी गई हैं। मेगस्थनीज ने भी धुलिकट्टा का जिक्र किया है। शहर इतना महत्वपूर्ण था कि इसकी रक्षा के लिए किलेबंदी की गई थी। धुलिकट्टा करीमनगर से 25 किलोमीटर दूर है।

करीमनगर

करीमनगर


करीमनगर
तेंलगाना के इस इलाके में पाषाण काल से ही मानव के रहने के सबूत मिले हैं। सातवाहन और चालुक्य राजवशों के समय यह एक महत्वपूर्ण शहर था। एलगंदल किला यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है । इसे करीब एक हजार साल पहले काकतीय शासन के समय बनवाया गया था। करीमनगर के पास ही जैगटियल किला है जिसे यूरोपियन इंजिनियरों ने यूरोप के किलों की तर्ज पर बनाया था। यहां का धुलिकट्टा एक बौद्ध स्थल है जहां सातवाहन काल के स्तूप मिले हैं। करीमनगर चांदी पर की गई बारीक कारीगरी के लिए प्रसिद्ध है।करीमनगर हैदराबाद से 165 किलोमीटर दूर है।

खम्मम

खम्मम


खम्मम
मुन्नेरू नदी के किनारे बसा है तेलंगाना का खम्मम। खम्मम का किला यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है जिसे काकतीय राजाओं ने 950 ईस्वी में बनवाया था। इस किले में कई राजवंशों के समय का स्थापत्य नजर आता है।खम्मम के पास ही नेलाकोंडापल्ली एक ऐतिहासिक जगह है। यहां मिट्टी की किलेबंद दीवार के साथ तीसरी से चौथी शताब्दी के बौद्ध विहार, स्तूप और भगवान बुद्ध की कांस्य प्रतिमा मिली है। नेलाकोंडापल्ली के पास महाभारतकालीन अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। खम्मम में कई प्राचीन मंदिर भी देखे जा सकते हैं।खम्मम हैदराबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर है।

राजमुंदरी

राजमुंदरी


राजमुंदरी
राजमुंदरी को आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है।माना जाता है कि तेलगू भाषा का विकास यहीं हुआ था। गोदावरी नदी का पाट यहां करीब पांच किलोमीटर चौड़ा है जो एक बड़ा आकर्षण है। यहां गोदावरी नदी के बीच एक पहाड़ी पर श्री वीरभद्रस्वामी का प्राचीन मंदिर है। अंग्रेजों के समय बना डोवालीस्वरम बांध देखने लायक है।इसके पास कॉटन म्यूजियम भी बना है। राजमुंदरी के पास जंगलों से ढ़की पपी पहाड़ियां एक खूबसूरत जगह है। यहां हर बारह साल में गोदावरी नदी पर पुस्करम उत्सव मनाया जाता है। राजमुंदरी हैदराबाद से 400 किलोमीटर दूर है।

एलुरू

एलुरू

एलुरू
तम्मिलेरू नदी के किनारे बसा है आंध्र प्रदेश का एलुरू शहर। एलुरू बौद्ध धर्म को मानने वाले वेंगी राज्य का हिस्सा था। यहां गुन्तुपल्ली की बौद्ध गुफाएं हैं। चट्टानों को काट कर बनाई गई इन गुफाओं में चैत्य गुफा और स्तूप मिले हैं। चैत्य गुफा के द्वार में पत्थर को खूबसूरती से तराशा गया है। यहां कई प्राचीन स्मारक हैं। एलुरू के पास भारत की ताजे पानी की सबसे बड़ी झीलों में से एक कोल्लेरू झील है। यहां सर्दियों में बहुत से प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। एलुरू हैदराबाद से करीब 330 किलोमीटर दूर है।

गुंटूर

गुंटूर

गुंटूर
कृष्णा नदी के किनारे बसा गुटूंर आंध्र प्रदेश के ग्रामीण जीवन की झलक देता है। ऐतिहासिक मंदिर, रहस्यमयी गुफाएं, जंगल और खूबसूरत समुद्री तट यहां देखने के लिए बहुत कुछ है। यहां की उनदावल्ली गुफाएं रॉक-कट स्थापत्य का बेहतरीन उदाहरण है। कोन्दाविदु किला यहां के इतिहास को बयान करता है। इस किले को वर्ष1250 में रेड्डी शासन के समय बनवाया गया था। गुंटूर के पास अमरावती एक ऐतिहासिक जगह है। यहां अमरावती के बौद्ध इतिहास के अवशेष और प्राचीन शिव मंदिर देखे जा सकते हैं। गुंटूर हैदराबाद से 270 किलोमीटर दूर है।

डिंडी

डिंडी


डिंडी
आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले का छोटा सा अनछुआ गांव है डिंडी। गोदावरी नदी के किनारे बसे डिंडी में सुरम्य बैकवॉटर, साफ पानी से भरी झीलें और छोटी – छोटी नदियां हैं। यहां पानी की नहरों के किनारे उगे नारियल के पेड़ और दूर-दूर तक फैले धान के खेत अलग दुनिया में आने का अहसास दिलाते हैं। शहरों की भागदौड़ और आधुनिक जीवन की आपाधापी से दूर यहां शांति से समय बिताया जा सकता है। पर्यटक यहां हाउसबोट में रहने का मजा भी उठा सकते हैं। डिंडी हैदराबाद से करीब 450 किलोमीटर दूर है।