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पर्यटन का बदलता बाज़ार

पर्यटन का बदलता बाज़ार

जब से मैंने दुबई पोर्ट से मैजेस्टिक प्रिंसेस क्रूज का अपना सफर शुरू किया तब से जहाज पर कुछ ऐसा था जो मुझे अलग सा लग रहा था। जहाज पर मौज मस्ती का माहौल था, बढिया खाना था। धूप सेकने के लिए शानदार डेक और भरपूर समुद्री नजारे। हाथ में हाथ डालकर घूमते बहुत से जोडे दिखाई दे रहे थे। उनसे आंखे मिलती तो वे मुस्करा भर देते और अपनी दुनिया में खो जाते। कुछ लोग किताबें पढने में मग्न थे तो कुछ दुनिया की बेहतरीन शराब से अपने गला तर करने में लगे थे।

मैजेस्टिक प्रिसेंस का डेक 16

सब कुछ वैसा ही जैसा किसी भी लक्जरी रिसोर्ट में देखा जा सकता है। लेकिन जो अलग था वो थे यहां मस्ती कर रहे ये लोग। आप शायद हैरान होंगे की इन लोगों में ऐसा क्या अलग हो सकता है।
अलग बात यह थी कि क्रूज पर दिखाई दिए लोगों में से करीब 60-70 फीसदी ऐसे थे जो शायद अपनी रिटारमेंट के बाद की जिंदगी जी रहे थे। इन सब की उम्र लगभग 60 के पार थी। लेकिन जिंदगी को जीने के उनके जोश में कोई कमी नहीं थी। वे यूं ही बेपरवाह मस्ती में थे जितना कोई युवा जोडा हो सकता है। सिर्फ जोडे ही क्यों जहाज पर इस उम्र के ऐसे भी बहुत से लोग थे जो अकेले ही खुशियां बटोरने के लिए निकल पडे थे।


ऐसा नहीं था कि क्रूज किसी खास उम्र के लोगों को लेकर निकला हो। जहाज पर युवा जोडे और दूसरे लोगों की भी खासी तादाद थी। बहुत से भारतीय परिवार मिले जो एक साथ क्रूज पर निकले थे। उन परिवारों में भी मुझे बुजुर्ग भी दिखाई दिए। लेकिन फिर भी इतनी बडी संख्या में बुजुर्गों का क्रूज पर होना मुझे चौंका गया।
क्रूज पर कुछ दिन बिताने और लोगों के बात करने के बाद मुझे समझ आया कि ऐसा क्यों है।

बुजुर्गों के लिए क्यों खास है क्रूज का सफर

इस उम्र के लोगों में भी घूमने की चाह किसी से कम नहीं लेकिन वे ऐसी जगह चाहते हैं जो सुरक्षित हो, साफ हो,रखरखाव बेहतर हो और जहां उनका ध्यान रखने के लिए लोग हो। इस मायने में क्रूज पूरी तरह खरा उतरता था। वहां के कर्मचारी हर वक्त लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार रहते थे।

सेहत का ध्यान

मैंने देखा कि कितने ही बुजुर्ग थे जो व्हीलचेयर या इलेक्ट्रिक साइकिल पर वहां घूम रहे थे। लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही थी। जहाज में आने जाने के लिए बने चौडे गलियारे और बडी लिफ्ट किसी तरह की परेशानी नहीं पैदा करते, जो आमतौर पर शहर में घूमने पर सामने आती है। क्रूज के सुरक्षित माहौल में मर्जी से कहीं भी आने जाने की आजादी उन्हें क्रूज के लिए आकर्षित करती है।

क्रूज में रहने से हर दिन नई जगह जाने और होटल तलाश करने की समस्या से पूरी मुक्ति मिल जाती है। क्रूज अपने सफर के दौरान लगभग हर दिन या किसी नए बंदरगाह पर पहुंचते हैं । उस नए शहर में घुमाने का इंतजाम पूरी सुरक्षा के साथ क्रूज कंपनी के द्वारा ही किया जाता है। पूरा दिन घूमने के बाद आप वापस आ जाते हैं अपने क्रूज की दुनिया में जहां शानदार शामें बिता सकते हैं। दुनिया के शहरों को इतनी बेफिक्री से देखने का मजा शायद क्रूज ही दे सकता है।

एट्रियम में डांस क्लास

क्रूज पर समय बिताना बहुत आसान है। वहां बहुत से मनोरंजक कार्यक्रम और गतिविधियां होती रहती हैं। आप अपनी पंसद के मुताबिक उनमें हिस्सा ले सकते हैं। वहां के एट्रियम में रोजाना लोगों को बॉल डांस सिखाया जाता था। वहां डांस सीखने वालों में बड़ी संख्या बुजुर्ग जोड़े थे। ये जोड़े बडे मजे से सिखाने वाले के निर्देशों का पालन करते थे। एट्रियम की सुनहरी बॉलकनी से उनको सीखते देखना भी एक अलग अनुभव था।

क्रूज पर होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेते लोग

मैंने वापस आकर इंटरनेट पर आंकडों को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि दुनिया भर में क्रूज के सबसे बड़े ग्राहक 60 से ऊपर की उम्र के लोग हैं। इन लोगों ने अपनी जिंदगी में पैसा कमाया है और अब वे उसे खर्च करना चाहते हैं। क्रूज उन्हें लक्जरी के साथ उन्हें वह सुविधा और सुरक्षा दे रहा है जो उन्हें चाहिए।
हम ये भी कह सकते हैं कि बुजुर्ग लोगों का एक बडा बाजार है जिसे क्रूज इंडस्ट्री ने शायद बहुत पहले ही समझ लिया।

लेकिन खास बात यह कि अभी भी दुनिया में घूमने के लिए तैयार इस सबसे बडे हिस्से पर ध्यान नहीं दिया गया है। यही वजह है कि अब होटल से लेकर एयरलाइन्स तक इस बढ़ते बाजार को अपनी तरफ खींचने में लगे हैं। बढ़ता बाजार शब्द सुनकर चौंकिए मत। दुनिया भर में बुजुर्ग की बढती संख्या वाकई एक बडा बाजार है। आज बेहतर होती स्वास्थ्य सुविधाओं, खान-पान और रहन सहन के कारण आम आदमी की औसत आयु बढती जा रही है। लोग लंबा और स्वस्थ जीवन जीने लगे हैं। ऐसे में जीवन की जिम्मदारियों को पूरा करने के बाद वे घर से बाहर निकलना चाहते हैं। इसलिए यह बाजार पक्के तौर पर बढने ही वाला है।

मैं करीब दस साल पहले हिमालय के एक ट्रेक पर गया था। खासा मुश्किल ट्रेक था । सुविधाएं भी ना के बराबर। उस ट्रेक पर मेरे साथ बैंगलोर से आए एक दंपत्ति थे । दोनों ही रिटायर्ड जिंदगी के दौर में थे। पति वैज्ञानिक रह चुके थे तो पत्नी कॉलेज प्रिंसिपल से रिटायर हुई थी। उनसे बात हुई तो पता चला कि उस समय तक वे दुनिया के दसियों देशों का चक्कर लगा चुके थे। शायद ही कोई महीना जाता हो जिसमें वे घूमने ना जाते हों। चाहे वह चक्कर विदेश का हो या देश में किसी जगह का। उस समय मैंने भले भी नहीं सोचा लेकिन क्रूज के सफर के बाद में कह सकता हूँ कि हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो बाहर निकल खुली आंखों से दुनिया को निहारना चाहते हैं।

जरा आंकडों पर नजर डालें

एक अनुमान के मुताबकि साल 2050 तक अमेरिका और चीन में 60 साल से ऊपर के लोगों की संख्या प्रत्येक देश में 100 मिलियन को पार कर जाएगी। और ये वो आबादी है जिसने वैश्विकरण के दौर में खासा कमाई भी की है। अब वे उस कमाई को अपने आराम पर खर्च करना चाहते हैं।

एक और आंकडा देखिए अमेरिका की अगर बात करें तो वहां खर्च होने वाले पैसे का 70% हिस्सा 60 साल से ऊपर की आयु वाले लोगों के पास ही है।

क्या बदलाव हो रहे हैं
दुनिया भर के होटल और हवाई जहाज कंपनियां विशेष सुविधाएं देने की कोशिश कर रही हैं। खास उम्र के हिसाब से इमारतों को बनाया जा रहा है।
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट का उदाहरण लिया जा सकता है। हीथ्रो दुनिया का पहला डिमेंशिया फ्रेंडली एयरपोर्ट है। यहां के कर्मचारियों को डिमेंशिया के मरीजों की सहायता के लिए खास तौर से प्रशिक्षित किया गया है।
शंघाई एयरपोर्ट पर इस तरह के बदलाव किए गए हैं कि हर उम्र के लोग आराम से सफर कर सकें ।

भारत के आंकडे भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। हमारे यहां तीर्थ यात्रा का प्रचलन तो सदियों से रहा है। लेकिन अब बुजुर्गों के समूह दुनिया को भी नापने के लिए निकल रहे हैं। और उन कंपनियों के लिए बड़ा बाजार खडा कर रहे है जो उन्हें प्यार और दुलार के साथ घुमा सकता है। और फिलहाल तो इस बाजार में क्रूज लाइनर का कब्जा नजर आता है। घूमने निकले पड़े ये बुजुर्ग साबित कर रहे हैं कि उम्र महज एक आंकडा भर है।

( This trip was organised by Cruise Professionals)