हिमाचल प्रदेश की 10 खूबसूरत जगहें

हिमाचल प्रदेश की 10 खूबसूरत जगहें

हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। इस देवभूमि में पर्यटकों के देखने के लिए ना जाने कितने जगहें हैं। आराम से समय बिताने के साथ पहाड़ों पर चढ़ने तक यहां सब कुछ किया जा सकता है। हिमाचल की दस जगहें इस लेख में शामिल की गई हैं। हिमाचल प्रदेश जाने पर आप इन जगहों को शामिल कर सकते हैं।

1- मनाली

हिमाचल प्रदेश का सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशन है मनाली। यहां के बर्फ से ढके पहाड़ों, देवदार के पेड़ों और फलों के बगीचों को देखने लोग खिचें चले आते हैं। गर्मियों में यहां मैदानों की गर्मी से राहत मिलती है तो सर्दियों में यहां बर्फबारी का मजा लिया जा सकता है। मनाली का पौराणिक महत्व भी है। माना जाता है इसका मनाली का नाम ऋषि मनु के नाम पर पड़ा। यहां के हिडम्बा देवी मंदिर की बहुत मान्यता है। रोमांचल खेलों को पसंद करने वालों के लिए भी मनाली पंसदीदा जगह है। मनाली दिल्ली से करीब 530 किलोमीटर दूर है।

2- कुल्लू घाटी


हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है।समुद्र तल से 1230 मीटर की ऊंचाई पर बसे कुल्लू को देवताओं की घाटी माना जाता है। कुल्लू में कई प्राचीन मंदिर हैं । ये मंदिर हिमाचल की पहाड़ी वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। कुल्लू का दशहरा तो विश्वप्रसिद्ध है। इसे देखने दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। व्यास नदी से बनी यह घाटी बेहद सुन्दर है। व्यास नदी का साफ पानी, फलों के बगीचे और घने जंगल इस घाटी को अनोखा बनाते हैं। यहां से ट्रेकिंग के लिए भी कई रास्ते जाते हैं। कुल्लू चंडीगढ से 280 किलोमीटर दूर है।

3- नग्गर
By Akshat Sharma – https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=59590375
कुल्लू घाटी का ऐतिहासिक कस्बा है नग्गर । यह कुल्लू की प्राचीन राजधानी था। उस दौर के भव्यता को याद दिलाता यहां का शानदार किला । नग्गर का किला हिमाचल की काठकोडी वास्तुकल का उत्तम उदाहरण है।आधुनिक समय में नग्गर को प्रसिद्ध मिली रूसी चित्रकार निकोलस रोरिक के घर के रूप में। निकोलस लंबे समय तक यहां रहे। घर को अब संग्राहलय में बदल दिया गया है। उनके घर, उनसे जुडी चीजों और चित्रों को आज भी नग्गर के उनके घर में देखा जा सकता है। नग्गर की प्राकृतिक सुन्दरता भी अद्भुत है। नग्गर कस्बा मनाली से 21 किलोमीटर दूर है।

4- रोहतांग दर्रा

भारत का सबसे प्रसिद्ध दर्रों में से एक है रोहतांग दर्रा। समुद्र तल से 3979 मीटर ऊंचाई वाले इस दर्रे पर पूरे साल बर्फ बिछी रहती है। यहां से बर्फ से ढके पहाडों का सुन्दर नजारा दिखाई देता है। यह दर्रा मनाली से लेह जाने वाले रास्ते पर है। मौसम ऐसा कि साल में मुश्किल से पांच महीने के लिए यह रास्ता खुलता है। मनाली आने वाला हर पर्यटक यहां जरूर आना चाहता है। यह पर्यावरण की समस्या को देखते हुए यहां आने वाली गाडियों की संख्या पर पाबंदी भी लगाई गई है।यह दर्रा मनाली से 50 किलोमीटर दूर है।

5-कसोल

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हिमाचल की पार्वती घाटी में बसा है छोटा सा कस्बा कसोल। पार्वती नदी के किनारे बसा यह कस्बा विदेशी सैलानियों में बहुत लोकप्रिय है। कसोल में प्रकृति के सुरम्य नजारे दिखाई देते हैं। पार्वती नदी का सफेद रेत का किनारा इसे और भी खास बनाता है।यहां इसराइली पर्यटक बहुत आते हैं।इसलिए इसे मिनी इसराइल भी कहा जाने लगा है।यहां बढिया इसराइली खाने का मजा लिया जा सकता है।कसोल से कई जगहों जैसे खीरगंगा और मलाना के लिए ट्रेक भी किया जा सकता है। कसोल कुल्लू से करीब 40 किलोमीटर दूर है।

6- डलहौजी
धौलाधार की पहाडियों के बीच बसा है हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत शहर डलहौजी। अंग्रेजों के समय बने इस हिलस्टेशन को पांच पहाड़ियों पर बसाया गया था। 2036 मीटर की ऊंचाई पर बसे डलहौजी ने औपनिवेशिक समय की विरासत के साथ प्राकृतिक सुन्दरता को आज भी बनाए रखा है। अंग्रजी दौर में बनाए गए चर्च और इमारतें यहां देखी जा सकती हैं। करीब 150 साल पुराना सेंट जॉन यहां का सबसे पुराना चर्च है। चीड़, देवदार और बुरांश के पेड़ डलहौजी सुन्दरता को और भी बढ़ा देते हैं।यह शहर पठानकोट से 80 किलोमीटर दूर है।

 
 
7-बीड बिलिंग

आसमान में पंछियों की तरह उड़ने की इच्छा हो तो हिमाचल के बीड बिलिंग में चले आइए।  बीड बिलिंग  पैराग्लाइडिग के खेल में दुनिया भर में पहचान बना रहा है। बिलिंग की चोटी से उड़ान भरने के बाद पैराग्लाइडर बीड के खूबसूरत हरे भरे मैदान में उतरते हैं। यहां आसमान में मंडराते रंग बिंरगें पैराग्लाइडर इंद्रधनुषी समा बांधते हैं। यहां तिब्बती शरणार्थियों की बस्ती भी है जहां बौद्ध संस्कृति को देख सकते हैं। बीड बिलिग में चाय के बागानों के बीच घूमने का अलग ही मजा है। यहां का गुनहेड गांव अपने आर्ट मेले के लिए प्रसिद्ध है
 

8-मसरूर रॉक कट टेंपल

 हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बना मसरूर मंदिर वास्तुशिल्प और स्थापत्य कला का अद्भभुत संगम हैं । पूरे पहाड़ को काट कर मंदिर में ढाल देना प्राचीन कारीगरी और विज्ञान का बेमिसाल नमूना है। 8वीं शताब्दी में बने इन मंदिरों का निर्माण बलुआ चट्टानों को तराश कर किया गया । उत्तर भारत में यह अपनी तरह का अकेला मंदिर है। यहां बलुआ चट्टानों को तराश कर करीब 15 मंदिर बनाए गए थे। इसे हिमाचल का एलोरा भी कहा जाता है। हालांकि ये मंदिर एलोरा से भी पुराने हैं।

9- पालमपुर


चाय के बागानों, हरे भरे जंगलों और धौलाधार के ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा है हिमाचल प्रदेश का प्यारा सा कस्बा पालमपुर। पालमपुर अपने चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध है। पहाडी ढलानों पर दूर दूर तक फैले बागान बड़े ही खूबसूरत दिखाई देते हैं। पालमपुर की खासियत है यहां का मौसम जो साल पर सुहावना बना रहता है।सर्दियों के मौसम में यहां आने पर बर्फ से ढके धौलाधार के पहाड़ों का शानदार नज़ारा दिखाई देता है। पालमुपर के आसपास देखने के लिए कई प्राचीन मंदिर हैं ।अंग्रेजी दौर की इमारतें, चर्च भी देखे जा सकते हैं।

10-बरोट


देवदार के घने पेड़ों से घिरी घाटी , शांत बहती नदी , अंग्रेजों के जमाने का पुराना बांध,  और झरने, बरोट में वह सब कुछ है जो शांति में कुछ दिन बिताने वाले पर्यटक को चाहिए। हिमाचल प्रदेश में मंडी जिले की चौहार घाटी में बसा बरोट हिमाचल प्रदेश का एक अनजाना हिल स्टेशन है । यहां पहुंच कर समय में पीछे आने का एहसास होता है। बडा भंगाल और छोटा भंगाल जैसे अंदरूनी इलाकों के लिए यहां से ट्रेक भी किया जा सकता है।  अंग्रजों के समय ऊहल नदी पर बना बांध यहां का प्रमुख आकर्षण है।

(2017 में दुनियादेखो पर पूरे वर्ष ट्रेवल पोस्टकार्ड सीरीज चलाई गई। इस लेख में शामिल जगहों को उन्ही पोस्टकार्ड से एक जगह जमा करके यहां लिखा गया है।)
 

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