वो हंसते चेहरे

वो हंसते चेहरे

मैं मैजेस्टिक प्रिसेंस क्रूज की 16 वीं मंजिल या जहाज की भाषा में कहें तो डेक पर बैठा था। सुबह के नाश्ते का समय था । डेक के रेस्टोरेंट में कांच की खिड़कियों से समुद्र को निहारते नाश्ता करते लोगों का तांता लगा था। तभी मेरे पास कोई आया ये पूछने की मुझे क्या चाहिए। लंबा स्मार्ट सा लडका । उसके नेम प्लेट पर नजर गई। रणबीर ( शायद यही नाम था) । मुस्कराहट के साथ उसने पूछा ‘क्या ले कर आऊं आपके लिए’।
जहाज पर दो दिन में इस मेहमाननवाजी की आदत हो चुकी थी। बस कुर्सी पर बैठो की मिनट भर के अंदर कोई आपके सामने होता है पूछने के लिए कि क्या चाहिए।
खैर कुछ खाने का मन नहीं था। तो रणबीर से बात ही करने लगा। मैंने पूछा इंडिया से । उसने पूछा आप कहां से मैने कहा दिल्ली बस फिर तो उसके चेहरे की मुस्कान और भी फैल गई। यही मुस्कान है जिससे जहाज के ये लोग अपने मेहमानों की स्वागत करते हैं हर वक्त । यकीन मानिए एक भी बार आपको ये मुस्कुराहट बेमतलब ओढी हुई नहीं लगेगी। बातों का सिलसिला चला तो पता चला कि रणबीर पिछले 11 साल से क्रुज पर है। करीब नौ महीने घर से दूर रहता है। तीन महीने के लिए घर जाता है।

मैंने पूछा कि घर की याद नहीं आती इतने दिन कैसे रह पाते हो वो भी समुद्र के बीच । उसने कहा यहां वही रह सकता है जो नौकरी समझ कर नहीं बल्कि मजे लेकर काम करे। ऐसा नहीं करो तो एक दिन भी निकालना मुश्किल है। इन लोगों की मुस्कराहट का राज समझ आ रहा था।

तभी उसे मुंबई का एक और साथी दिखाई दिया । मुझसे मिलवाने के लिए उसको आवाज देकर बुलाता है। वो भी हंसता हुआ आया । नाम याद नहीं आ रहा । लेकिन वह भी मस्त हंसते हुए बताता रहा कि 15 साल से क्रूज पर काम कर रहा है लेकिन बोर नहीं हुआ। यही मस्ती है जो ये लोग यहां आने वाले मेहमानो से भी बांटते हैं। आपको एक पल के लिए भी नहीं लगेगा कि ये लोग दिल से काम नहीं कर रहे।

दोनों से बात कर ही रहा था कि दोनों को उनका एक और साथी दिखाई दिया। बोले सर ये है प्रसाद हमेशा जोक मारता है। प्रसाद का नाम याद रह गया मुझे। उसके बाद हम चारों काफी देऱ तक बाद करते रहे। भारत का होने का यह फायदा था कि हम सब आराम से बात कर रहे थे। उन तीनों के हंसते चेहरे अभी भी याद हैं । फिर उनसे कहा कि एक फोटो हो जाए फटाफट फोटो देने के लिए तीनों तैयार हो गए बिल्कुल मुस्कुराते हुए।

लेकिन ये तीनों कोई अलग नहीं। जहाज पर किसी भी जगह जाइए वहां के लोग मुस्कराते मिलेगें। मदद करने को हर समय तैयार। कमरे की देखभाल करने वाले हों , मैनेजर हो या कोई दूसरा कर्मचारी सबके सब दिल को खुश करने वाली मुस्कुराहट के साथ ही मिलते हैं। उनमें कोई बनावट नजर नहीं आती।

एक रेस्टोरेंट की मैनेजर थीं। पहले दिन एक रात के खाने के समय मिली। हमने कुछ भारतीय खाना मांगा। उनके मेन्यू में नहीं था लेकिन ला कर दिया। उसके बाद अगले दिन अल-सुबह सबसे ऊपर के डेक पर मिल गई जहां नाश्ता होता था । मैंने कहा आप सोई नहीं तो हंसते हुए बोली आपकी आँखे लाल है सो तो आप भी नहीं रहे। मैंने कहा इतना अच्छा क्रूज आपने बनाया है यहां सोने का समय कहां है। हम दोनों ही हंसने लगे। उसके बाद अगले 5 दिन कहीं भी मिलती तो हम लोग आपस में हाल-चाल जरूरे पूछते । बीच में एक दिन मौसम खराब था तो मिलते ही उन्होंने कुछ हिदायतें और तबीयत खराब होने पर ली जाने वाली गोली के बारे में खुद ही बता दिया। उन्हे याद रहता था कि मैं कुछ दोस्तों के साथ हूं तो सबके बारे में भी पता कर लेती। यही कुछ बाते हैं जो किसी सफर को यादगार बना देती हैं।

आखरी दिन इमीग्रेशन का काम पूरा करना था इसलिए पांचवी मंजिल पर रिसेप्शन पर पहुंचा। रिसेश्पशन पर जिसकी ड्यूटी थी उसने पता किया कि इमीग्रेशन के लोग कहां बैठे हैं? पांचवे मंजिल से चौदहवी मंजिल तक मुझे वहां छोडने गया । वहां लोग नहीं मिले तो फिर उसने पता किया लेकिन जब तक वो नहीं मिले उसने रास्ता बता कर उपना पीछा नहीं छुडाया।

शायद जब आप धरती से दूर समुद्र में हो । आपको पता हो कि यही कुछ लोग हैं जो आपके साथ अगले कुछ दिन रहेंगें तो आपस में जुडना काफी आसान हो जाता है। यही वजह है कि घर से दूर रहते हुए भी जहाज के लोग दिल खोल कर हंसते मुस्कुराते हैं और हमेशा पूछते हैं आपको क्या चाहिए।
मैं अभी क्रूज से वापस आ चुका हूँ लेकिन ऐसा लगता है कि ये मुस्कराहट क्रूज से दूर नहीं होने देगी….

( this trip was organised by cruise professional )

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